देसी हथियारों से पाकिस्तान का इलाज करेगी भारतीय सेना

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भारत-पाकिस्तान (India Pakistan war) के बीच हालात सामान्य नहीं हो रहे हैं। युद्ध के हालातों और पाकिस्तान की नापाक हरकतों के बाद अब भारतीय सेना ने पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए नया प्लान तैयार कर लिया है। भारतीय सेना अब फिर से अपने पुराने तरीके से युद्ध के मैदान मे पाकिस्तान को धूल चटाएगी। पाकिस्तान की ओर से गोलाबारी और घुसपैठ से निपटने के लिए सेना ने भारत में बने हथियार और निगरानी के उपकरण की मांग की है। सेना के अधिकारियों का कहना है कि जब से जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाया (Article 370 removed from Jammu and Kashmir) गया है तब से पाकिस्तान और ज्यादा हिंसक हो गया है।

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2,050 से अधिक सीजफायर उल्लंघन

पाकिस्तान ने 2,050 से अधिक बार सीजफायर के उल्लंघन किए हैं। इसके 20 से अधिक लोगों कि जान भी जा चुकी है। पाकिस्तान लगातार भारत को युद्ध के लिए प्रेरित कर रहा है। जहां पाकिस्तान के जवान सीजफायर कर भारतीय जवानों को उकसा रहे हैं वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री दुनिया के सामने अच्छाई का मुखौटा पहनकर कह रहे हैं कि वे पहले भारत पर हमला नहीं करेंगे। पाकिस्तान के इसी दोहरे रवैये को देखते हुए भारतीय सेना ने देसी हथियारों की मांग की है।

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इस बारे मे भारतीय सेना के एक अधिकारी का कहना है कि सेनाओं के वाइस चीफ को प्रोक्योरमेंट की शक्ति देना सरकार की ओर से सकारात्मक कदम है। हम महत्वपूर्ण गोला-बारूद और इक्विपमेंट हासिल करने में सक्षम हैं क्योंकि इनके प्रोक्योरमेंट की प्रायरिटी और शक्ति हमारे पास है। इससे स्नाइपर राइफल, निगरानी उपकरणों, स्पेशलाइज्ड एम्युनिशन और स्पेयर्स के लिहाज से हमारी तैयारी काफी मजबूत हुई है। हम चाहते हैं कि पाकिस्तान के साथ मुकाबले के लिए इस्तेमाल होने वाले सभी इक्विपमेंट देश में ही बनाए जाएं। हम नाइट विजन डिवाइसेज, अनमैन्ड एरियल वीइकल (UAV) का स्वदेशीकरण चाहते हैं।

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देश की तकनीक है सर्वश्रेष्ठ

सेना के अधिकारियों का मानना है कि देश में तकनीक सबसे अच्छी है। एक अधिकारी ने बताया कि हम यह देख रहे हैं कि देश में कितनी टेक्नॉलजी मौजूद है। आर्टिलरी के लिए टेक्नॉलजी है और इसमें टेक्नॉलजी के ट्रांसफर से भी अच्छा फायदा होगा। हाला्ंकि, प्राइवेट सेक्टर की टेक्नॉलजी को अपनाने की क्षमता कम है। हाई-ऐंड इक्विपमेंट के लिए टेक्नॉलजी की अधिक जरूरत है और इसके लिए रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट पर जोर देना होगा।

 

    – रंजीता पठारे 

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