भारत में मातृ मृत्यु दर में 77 फीसदी की कमी

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हमारे देश में राजनीतिक पार्टियों के वादों के अनुरूप पिछले 26 वर्षों में हिंदुस्तान ने प्रगति की हो या न की हो, लेकिन स्वस्थ रहने के मामले में 1990 से लेकर 2016 तक क्रांतिकारी परिवर्तन हुआ है, जिस कारण भारत की प्रशंसा विश्व मंच पर की जा रही है| भारत में मातृ मृत्यु दर में 77 फीसदी कमी आंकी गई है|

दरअसल अंतरराष्ट्रीय संगठन यूनिसेफ ने मातृ मृत्यु दर संबंधी कुछ नए आंकड़े जारी किए हैं, जिनके अनुसार भारत में सन 1990 में एक लाख शिशुओं को जन्म देने पर 556 माताओं की मृत्यु हो जाती थी, जिनकी संख्या 2016 में घटकर 130 हो गई है| इनमें सबसे अधिक कमी उत्तरप्रदेश में आंकी गई है|  यूनिसेफ इंडिया की प्रतिनिधि यास्मीन अली हक ने मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाने पर भारत की सराहना की है| उन्होंने कहा कि आंकड़ों को देखकर कहा जा सकता है कि भारत का युवा जागरूक हो रहा है और देश वाकई बदल रहा है|

गौरतलब है कि इस सर्वेक्षण में 62,96,101 गर्भवती महिलाओं को शामिल किया गया, जिनमें से 556 की मौत हुई थी| डब्ल्यूएचओ की दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक पूनम खेत्रपाल सिंह ने कहा, “भारत का मौजूदा एमएमआर सहस्राब्दि विकास लक्ष्य (एमडीजी) से नीचे है|” संगठन ने कहा कि देश की यह प्रगति सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) प्राप्त करने की तरफ बड़ा कदम है क्योंकि इसके तहत देश में प्रति 1,00,000 पर इसे 70 से नीचे लाने का लक्ष्य रखा गया है|

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