21 दिन के लाॅकडाउन ने तोड़ी अर्थव्यवस्था की कमर, आगे जाने क्या होगा?

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भारत कोरोना से जंग बेहद ही मजबूती से लड़ रहा है। भारत में 21 दिन का लाॅकडाउन भी आज पूरा हुआ और उसी के साथ 3 मई तक इसे आगे भी बढ़ा दिया गया है। लाॅकडाउन में भारत कोरोना से तो लड़ रहा है, लेकिन इसके चलते हमारी अर्थव्यवस्था जरुर बीमार पड़ गई है। इन 21 दिनों में भारत को करीब 8 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है(Lockdown Impact On Indian Economy)

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अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका
पीएम नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए 24 मार्च को 21 दिन के देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की थी, जो आज 14 अप्रैल को खत्म हो रहा है। इस लॉकडाउन के दौरान अधिकतर कंपनियां, उद्योग-धंधे बंद रहे, उड़ान सेवाएं निलंबित रहीं और ट्रेनों के पहिए थमे रहे। वहीं, लोगों और वाहनों की आवाजाही भी बंद रही। इस लॉकडाउन की वजह से भारत की 70 फीसदी आर्थिक गतिविधियां थम गईं। कुल मिलाकर एक दम से अर्थव्यवस्था नीचे आ गई। देश जहां था वहीं थम गया।

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हर दिन 35 हजार करोड़ का नुकसान!
रेटिंग एजेंसी ‘एक्यूट रेटिंग्स ऐंड रिसर्च लिमिटेड‘ ने इससे पहले अनुमान जताया था कि लॉकडाउन की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था को हर दिन करीब 35,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। इस तरह देखा जाए तो 21 दिन के पूरे लॉकडाउन की अवधि में जीडीपी को 7 से 8 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
जीडीपी ग्रोथ आएगी नीचे
लॉकडाउन के दौरान केवल जरूरी सामान एवं कृषि, खनन, आवश्यक सेवाओं और कुछ वित्तीय एवं आइटी सेवाओं को चलाने की ही इजाजत दी गई थी। भारतीय अर्थव्यवस्था पहले से ही सुस्त थी और ऐसे में आई कोरोना महामारी ने इसे बिल्कुल पस्त कर दिया है। इस वजह से तमाम देशी- विदेशी रेटिंग एजेंसियों ने इस वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को घटाकर 1.5 से 2.5 फीसदी के काफी निचले स्तर पर कर दिया है।(Lockdown Impact On Indian Economy)
कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर लगातार विफल होती केंद्र सरकार के लिए लाॅकडाउन के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था को फिर से मजबूत करना काफी ज्यादा चुनौतीभरा रहेगा। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों मंे केंद्र सरकार इसे फिर से पटरी पर लाने के लिए क्या कदम उठाती है।

-Rahul Kumar Tiwari

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