भारत अब गोबर और गोमूत्र से उड़ाएगा रॉकेट

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भारत ने हाल ही में चंद्रयान-2 लॉंच (Chandrayaan-2 launch) किया था, जिसके बाद पूरे विश्व में भारत का परचम लहराया था। अब फिर भारत अंतरीक्ष जगत में कुछ नया करने जा रहा है। इस बार भारत ईंधन की लागत को कम करने के लिए एक बड़ा एक्सपेरिमेंट कर रहा है। अब भारत पहला ऐसा देश होगा, जो गोबर से रॉकेट उड़ाएगा। इसके लिए देश में तैयारियां भी की जा रही है। बड़े पैमाने पर शोध किया जा रहा है।

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 महिला प्रोफेसर का दावा गोबर से उड़ाएंगे रॉकेट

गोबर से रॉकेट उड़ाने का दावा एक महिला प्रोफेसर द्वारा किया जा रहा है। गोबर से हाइड्रेजन गैस बनती है, जिसका ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। अब इसका आवश्यक परिष्करण करने के बाद रॉकेट के प्रोपेलर में ईंधन के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (National Institute of Technology) आदित्यपुर में इस पर शोध भी किया जा रहा है। एनआइटी की सहायक प्रोफेसर दुलारी हेंब्रम (NIT Assistant Professor Dulari Hembram ) ने इस पर पिछले कई वर्षों से शोध कर रही है। उनका कहना है कि वह अभी दो और शोध पत्र जमा करने वाली हैं और अपने शोध के निष्कर्ष को लेकर उत्साहित हैं।

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एनआइटी की सहायक प्रोफेसर दुलारी हेंब्रम का कहना है कि ईंधन के रूप में इस्तेमाल होने वाली हाइड्रोजन गैस के उत्पादन पर फिलहाल प्रति यूनिट सात रुपये खर्च आ रहा है। यदि सरकार इसके उत्पादन को प्रोत्साहित करेगी तो इसका उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जा सकता है। ऐसा करने से देश में बिजली की समस्या भी दूर हो सकती है। यही नहीं, इसे रॉकेट में प्रयुक्त होने वाले ईंधन के सस्ते विकल्प के रूप में भी विकसित किया जा सकता है। कॉलेज की प्रयोगशाला छोटी है। इस प्रोजेक्ट को किसी तरह की सरकारी मदद भी नहीं मिल रही है, सो अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है। गोमूत्र और गोबर से वैकल्पिक ऊर्जा का उत्पादन है, जिसका हमे अच्छे से उपयोग करना होगा। तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले में स्थापित महर्षि वाग्भट्ट गोशाला व पंचगव्य विज्ञान केंद्र में भी गोमूत्र-गोबर से हाइड्रोजन गैस के उत्पादन पर काम हो रहा है।

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    – Ranjita Pathare

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