मिशन 5 ट्रिलियन इकोनॉमी पर भारी भुखमरी के ये आंकड़े

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देश मिशन 5 ट्रिलियन इकोनॉमी (Mission 5 Trillion Economy) की ओर आगे बढ़ रहा है। प्रगृति की गाथा गाई जा रही है। सरकार अपने द्वारा किये गए कार्यों, योजनाओं का बखान कर रही है, इन सभी के बीच भुखमरी के ऐसे आंकड़े सामने आये हैं, जो सरकार के कार्यों की पोल खोल रहे हैं। जहाँ एक ओर छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में मिड डे मील (Midday Meal) के तहत दिए जाना वाला अंडा खानपान के साथ छेड़छाड़ का विवाद बन गया है। वहीँ भुखमरी के आंकड़ों के कारण भी नया बवाल शुरू हो गया है।

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खाद्य सुरक्षा और पोषण को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें बताया है कि दुनिया में अब भी 82 करोड़ से अधिक लोग भूखे हैं। यहाँ भूख से मतलब एक दिन की भूख नहीं, बल्कि पर्याप्त भोजन की कमी से है। रिपोर्ट में बताया गया है कि एक दशक तक भूख और कुपोषण के खिलाफ मुहिम में मिली कामयाबी के बाद अब एक बार फिर से भुखमरी दुनिया भर में सिर उठा रही है और पिछले 3 साल में हालात फिर से बिगड़ने लगे हैं। एक साल के अंदर भूख से पीड़ित लोगों की संख्या में करीब 1 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है।

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संयुक्त राष्ट्र द्वारा दावे किये गए हैं कि 2030 तक दुनिया भर से भूख मिटाने यानी जीरो हंगर के लक्ष्य पर कार्य किया जा रहा है। भुखमरी के शिकार कुल 82 करोड़ लोगों में करीब 51 करोड़ एशिया में हैं और इसमें भी सबसे बड़ा आबादी का हिस्सा भारत का है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 20 करोड़ लोगों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल रहा है। 5 साल से कम उम्र के ढाई करोड़ बच्चों का वजन सामान्य से कम है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2024 तक भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने की बात कर रहे हैं, लेकिन शायद सरकार ने देश के भीतर की भूख और कुपोषण की सच्चाई को नजरअंदाज करके यह लक्ष्य बनाया है। ग्लोबल हंगर इंडेक्स ( Global Hunger Index ) में 118 देशों की सूची में भारत पिछले साल 103 वें नंबर पर रहा। बांग्लादेश और नेपाल जैसे देश उससे बेहतर स्थिति में हैं।

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संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट कहती है, “2008-09 में आई वैश्विक आर्थिक मंदी के बाद कई देशों में आर्थिक तरक्की की ढुलमुल रफ्तार, भूख और कुपोषण के खिलाफ जंग में बाधक बन रही है। ” जाहिर तौर पर यह बात भारत पर भी लागू होती है जहां अर्थव्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही। यहां सरकार भुखमरी को भुलाकर देख के विकास की बात कर रही है, लेकिन अब इस रिपोर्ट के बाद शायद कुछ बदलाव होगा।

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