हिंदू महासभा का शरिया अदालत को जवाब

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हिंदू महासभा द्वारा हिंदू धर्म को खतरा बताया गया और हिंदू अदालत स्थापित करने का निर्णय लिया गया। अखिल भारतीय हिंदू महासभा 15 नवंबर को नाथूराम गोडसे को फांसी दिए जाने के दिन अलीगढ़, हाथरस, मथुरा, फिरोज़ाबाद और शिकोहाबाद में भी हिंदू अदालत की स्थापना की जाएगी। इसके बाद जल्द ही 15 अदालतें स्थापित करने का लक्ष्य है। साथ ही अदालत की पहली न्यायाधीश के रूप में एक महिला को नामित करने पर भी घोषणा की है। ये जानकारी मेरठ में अखिल भारतीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अशोक शर्मा के द्वारा मीडिया को दी गई। अशोक शर्मा के अनुसार, अलीगढ़ निवासी डॉक्टर पूजा शकुन पांडे को सोमवार को स्थापित हिंदू अदालत की पहली हिंदू जज भी घोषित कर दिया गया है।

अशोक शर्मा ने कहा कि “हिंदू अदालत का लाभ परेशान लोगों को मिलेगा| जमीन, मकान, दुकान, विवाह, पारिवारिक विवाद आदि मामले आपसी सहमति से सुलझाए जाएंगे।  उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ से की गई उपेक्षा की वजह से भी अदालत गठित करनी पड़ी है।

हिन्दू महासभा द्वारा पीएम और सीएम को पत्र भी लिखा गया था, जिसमें कहा गया था कि भारत में एक ही संविधान माना जा सकता है। देश में खुली और खुलने वाली शरिया अदालतों को तत्काल बंद करवाया जाए नहीं तो हिंदू महासभा 15 अगस्त को हिंदू अदालत खोल देगी।  महासभा का कहना है कि पत्र का जवाब नहीं आने पर बुधवार को अदालत की स्थापना का ऐलान कर दिया गया।

हिंदू अदालत की पहली न्यायाधीश के तौर पर नामित डॉक्टर पूजा शकुन पांडे का कहना है कि उनकी अदालत को उसी तरह किसी की मान्यता की ज़रूरत नहीं है, जिस तरीके से बिना मान्यता के खुद के कानून पर शरिया अदालतें चल रही हैं।

हिन्दू महासभा बिना इजाज़त चल रही शरिया अदालतों के खिलाफ है और इसे असंवैधानिक बता रही है।

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