पाकिस्तान में हिन्दुओं के साथ जो होता है सुनकर रूह कांप जाएगी

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दोनों सदनों में सर्वसम्मति के नागरिक संशोधन बिल (citizenship amendment bill) आखिर पास हो ही गया। (Religious discrimination Pakistan) हालांकि इस बिल के पास होने के बाद देश के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हो रहा है। वहीं विपक्ष भी लगातार इस बिल का विरोध कर रही है। लेकिन देश में कई ऐसे नागरिक हैं जो इस बिल का जश्न मना रहे हैं। इस बिल के पास हो जाने से कई शरणार्थियों को राहत मिली है। ऐसी ही एक महिला हैं 48 वर्षीय शमां जो पाकिस्तान से 21 वर्ष पूर्व भारत में आकर बसी थी लेकिन अभी तक उन्हें भारतीय नागरिकता प्राप्त नहीं हुई। शमां बताती हैं कि पाकिस्तान में हिन्दुओं के साथ (Religious discrimination in Pakistan) कैसी व्यवहार किया जाता है।

गौरतलब है कि जब 48 वर्षीय शमां से इस बारे में बात की गई तब उन्होंने बताया कि वे पाकिस्तान के बाऊपट्टी सियालकोट में रहती थीं जहां बेहद ही कम हिन्दू परिवार थे या यूं कहें कि न के बराबर। ( Religious discrimination Pakistan) उन्होंने बताया कि पाक में हिन्दू रीति-रिवाजों का मजाक उड़ाया जाता है और तमाशा बनाया जाता है। पाकिस्तान में वैसे भी हिन्दू बेहद कम हैं और जो हैं भी वे भी अब धीरे-धीरे मुस्लिम बनते जा रहे हैं। इसी वजह से शमां 21 वर्ष पहले ही भारत में आ बसी थीं लेकिन उनका भरोसा भारतीय सिस्टम से भी पूरी तरह से उठ चुका था। दरअसल इसके पीछे वजह थी उनको भारतीय नागरिकता न मिलना। वे भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए जालंधर से लेकर राजधानी दिल्ली तक कई बार चक्कर काट चुकी हैं लेकिन न तो उन्हें भारतीय नागरिकता मिली है न ही उनकी कोई सुनवाई हुई।

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शमां अपने पति कृष्ण लाल, बेटी चंदा, सुमन व बेटे विजय और मां सत्या के साथ भारत आ गयी थी। भारत में आने के बाद वे जालंधर के भार्गव कैंप में रहने लगी। शमां ने बताया कि उनका परिवार पकिस्तान में सुरक्षित महसूस नहीं करता था इसलिए जब 1997 में उनके पति कृष्ण लाल भारत में अपने रिश्तेदारों से मिलने आए और 20 दिन बाद वापस पाकिस्तान लौटे तो उन्होंने अपने परिवार के साथ भारत में आकर बसने का फैसला किया। इसके 8 माह बाद शमां और उनका परिवार भारत आ गया। लेकिन भारत में आने के बाद उनकी मुसीबतें कम होने की जगह पर और भी ज्यादा बढ़ गईं। उन्हें यहां हर हफ्ते थाने में हाजिरी लगवानी पड़ती, डीसी कार्यलय जाकर एमए ब्रांच में जाकर अर्जी देनी पड़ती थी। इसके बाद भी सरकारी कर्मचारी उनसे पैसे पैसे वसूलते और अर्जी देने व हाजिरी लगवाने में ही उनका पूरा दिन बीत जाता।

हालांकि शमां का कहना है कि वे इस भारतीय सिस्टम से इतना निराश हो चुकी थीं कि उन्होंने वापस पाकिस्तान का मन बना लिया था। लेकिन अब यह बिल पास हो जाने से उनके परिवार ने राहत की सांस ली है। उनका कहना है कि जिसका सपना वे कई सालों से संजोय थी वह अब जाकर पूरा होगा और उन्हें भी भारत की नागरिकता मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में उनके परिवार के साथ बेहद बुरा बर्ताव किया जाता था और उन्हें काफिर कहकर संबोधित किया जाता था।

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उनके परिवार का कोई लड़का विरादरी से बाहर शादी नहीं कर सकता था जबकि मुस्लिम लड़के हिन्दू परिवार की लड़कियों से जबरन शादी करते थे। अगर इसकी शिकायत की जाती तो सरकारी अफसर हिन्दू परिवार को ही डांटता-डपटता था। हिन्दू रीती से कोई भी परिवार शादी नहीं कर सकता था। किसी भी व्यक्ति की मौत हो जाने पर उसका शवदाह करने पर भी भारी विरोध होता था।

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Prabhat Jain

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