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सिरदर्द बने सांसदों से बलपूर्वक खाली कराएं जाएंगे बंगले

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दिल्ली में पूर्व सांसदों के बंगलों को अब बलपूर्वक खाली करवाया जाएगा। लुटियन दिल्ली स्थित सरकारी आवास (Lutyens Delhi Government Accommodation ) में रहने की पात्रता गंवा चुके पूर्व सांसदों से बंगले खाली कराने के साथ आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने सांसदों एवं मंत्रियों के उन अतिथियों से भी ज़बरन बंगले खाली कराने मुहिम शुरू करने के आदेश दिये हैं, जो लंबे समय से  सरकारी बंगलों में धाक जमाकर बैठे हुए हैं।

मंत्रालय ने शुरू की तैयार

मंत्रालय के संपदा निदेशालय ने ऐसे पूर्व सांसदों की सूची तैयार की है, जिनमें ऐसे लोगों के नाम शामिल किए गए हैं, जो बंगला खाली करने में आनाकानी कर रहे हैं। सरकारी संपत्ति से अनधिकृत कब्जों की बेदखली के लिये हाल ही में सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम 2019 लागू किया गया। जिसके बाद से संपदा निदेशालय ने पूर्व सांसदों के बंगले खाली करवाने का आदेश जारी कर दिया है। पिछले सप्ताह सरकारी बंगला खाली नहीं करने वाले 50 पूर्व सांसदों को तीन दिन में बंगला खाली करने या इसका जवाब देने का निर्देश दिया गया था। वहीं पूर्व सांसद दीपेंद्र हुड्डा, पूर्व सांसद और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ व सपा की डिंपल यादव सहित 10 पूर्व सांसदों ने बंगले खाली हो गए हैं।

मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि आवास खाली करने के नोटिस का तीन दिन में पालन नहीं करने या इसका उचित कारण नहीं बताने पर संशोधित कानून के तहत पुलिस द्वारा उक्त संपत्ति को सख्ती से खाली कराने का प्रावधान है। अभी तक 40 पूर्व सांसदों ने बार-बार नोटिस भेजने के बावजूद सरकारी बंगले खाली नहीं किए हैं। बंगला नहीं खाली करने वालों में मंत्री नितिन गडकरी और महेन्द्र नाथ पांडे के अलावा पूर्व सांसद संजय सिंह, उदित राज, ओपी यादव और सी पी जोशी के अतिथि भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि नये कानून की सख्ती के बाद पूर्व सांसद कामेश्वर सिंह ने भी सरकारी आवास छोड़ दिया है। लोकसभा के 1967 में सदस्य रहे सिंह, बतौर अतिथि, साउथ एवेन्यू स्थित बंगले में रह रहे थे।

        – Ranjita Pathare

 

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