Gandhi Jayanti 2019 : मॉब लिंचिंग से ऐसे बचे थे बापू

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पूरी दुनिया को अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले महात्मा गांधी (Gandhi Jayanti 2019) के विचार आज भी ज़िंदा है। वे हिंसा से दूर अहिंसा के मार्ग पर चलकर अपना मुकान हासिल करने की सीख देते थे। आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (Father of the Nation Mahatma Gandhi) की 150 वीं जयंती है, इस मौके पर पूरे देश मे उन्हें याद किया जा रहा  है। कई कार्यक्रमों के आयोजन करवाए जा रहे हैं। बापू के विचारों को साझा किया जा रहा है, उनकी कहानियाँ सुनाई जा रही है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक बार महात्मा गांधी भी मॉब लिंचिंग का शिकार (Mahatma Gandhi also a victim of mob lynching) होते-होते बच गए थे।

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पिछले कुछ वर्षों से मॉब लिंचिंग (mob lynching) के आंकड़ों में तेजी से वृद्धि हो रही है। गुस्साई भीड़ बेबस व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर देती है। इसी मॉब लिंचिंग  के शिकार होने वाले थे महात्मा गांधी। लगभग 125 वर्ष पूर्व दक्षिण  आफ्रिका में मोहनदास करमचंद गांधी (Gandhi Jayanti 2019) नाम के एक युवा भारतीय वकील को भी हिंसक भीड़ का सामना करना पड़ा था, लेकिन वे किसी तरह बचकर निकल गए थे। गांधीजी 1896 तक एक अच्छे राजनेता के रूप में स्थापित हो चुके थे। इसके बाद 22 अगस्त, 1894 को नताल इंडियन कांग्रेस (एनआईसी) की स्थापना की और दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के हितों के लिए संघर्ष करते रहे।

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27 साल की उम्र में बापू ने ‘ग्रीन पंफ्लेट’ नामक एक पुस्तक लिखी थी, जिसमें दक्षिण अफ्रीका में भारतीय गिरमिटिया मजदूरों और कुलियों की स्थिति और वहां हो रहे मानव अधिकारों के उल्लंघन का जिक्र किया था। इस बूक के आने के बाद 30 नवंबर, 1896 को बापू अपने परिवार के साथ दक्षिण अफ्रीका पहुंचे। बापू के पहुंचने से पहले ही वहाँ ‘ग्रीन पंफ्लेट’ के कारण हंगामा मचा हुआ था।

ऐसा कहा जाता है कि गांधी का जहाज जब डरबन पहुंचा तो पहले उसे तीन दिन तक बंदरगाह आने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद जब उन्हें जाने की अनुमति मिली तब जैसे ही महात्मा गांधी जहाज से उतरे वैसे ही गोरों ने उन्हें पीटना शुरू कर दिया। उसी समय वहाँ से पुलिस अधीक्षक आरसी एलेक्जेंडर की पत्नी सारा वहां से गुजर रही थीं, जिनहोने बापू की मदद की और पुलिस को बुलाया। बापू को छुड़ाकर जीवनजी रूस्तमजी के घर ले जाया गया था, लेकिन भीड़ वहाँ भी पहुँच गई।  इसके बाद सुपरिंटेंडेंट की सलाह पर गांधी सिपाही का भेष धारण कर वहां से जान बचाकर निकल गए और उनकी जान   बची।

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      -Ranjita Pathare

 

 

 

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