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राजीव गांधी ने नहीं इसने खुलवाया था 1986 में राममंदिर का ताला

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नई दिल्ली: रामजन्मभूमि विवाद (Ayodhya Land Dispute Case) पर सुप्रीम कोर्ट का आज ऐतिहासिक फैंसला आ गया. जिसमे विवादित स्थल पर राममंदिर(Ram Temple) और मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ जमीन देने के लिए केंद्र को आदेश दिया गया है मतलब मंदिर मस्जिद दोनों बनेगे। इस फैंसले के बाद अब सभी पुरानी बताए निकल के आ रही है की किसने क्या किया इस मुद्दे के निराकरण के लिए। ऐसा कहा जाता है की 1986 में राममंदिर का ताला खुलवाने में राजीव गांधी(Former PM Rajiv Gandhi)  की भूमिका थी। लेकिन परिणाम आने के बाद खुलासा हुआ है की 1986 में राममंदिर का ताला खुलवाने में राजीव गांधी की कोई भूमिका नहीं थी।

जानकारी के अनुसार अयोध्या पर करीबी नजर रखने वाले जनमोर्चा अखबार के संपादक शीतला सिंह ने अपनी एक मुलाकात के बारे बताते हुए कहा की राजीव गांधी ने खुद इस बात से इनकार किया था कि उनकी राममंदिर का ताला खुलवाने (Unlocking the Ram Temple) में कोई भूमिका थी. इस बारे में इलाहाबाद (Allahabad) के सीजेएम रहे सीडी राय (CJM CD Rai) बताते हैं कि 1986 में यह मामला तत्‍कालीन जिला जज केएमए पांडे (Justice KM Pandey) की अदालत में लंबित था. अयोध्‍या और आसपास के लोगों को उम्‍मीद थी कि जल्‍द ही मामले में फैसला आ जाएगा. जस्टिस पांडे ने भी फैसला सुनाने से पहले पूरी तैयारी की.

फैसले में जिला जज पांडे ने प्रशासन को स्‍पष्‍ट आदेश दिया कि अदालत से विवादित स्थल तक पहुंचने के समय के भीतर राममंदिर का ताला खोल दिया जाए मतलब  प्रशासन को एक घंटे से भी कम वक्त दिया गया. फैजाबाद के डीएम और एसपी का वादा धरा रह गया और फैसला आने के बाद प्रशासन के विवादित स्‍थल तक पहुंचने से पहले ही हजारों लोग वहां पहुंच गए. भीड़ ने राममंदिर का ताला तोड़ दिया. लिहाजा, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है कि ताला किसने खोला? ये सब अदालत के फैसले के बाद हुआ, इसलिए पुलिस या प्रशासन ने घटना की जांच करने की कोशिश भी नहीं की.

-Mradul tripathi

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