पहली बार दलित साधु को मिली उपाधि  

0

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद द्वारा पहली बार एक दलित संत को धर्माचार्य की बड़ी उपाधि देने की घोषणा की गई| इसके बाद दलित संत कन्हैया कुमार कश्यप को इलाहाबाद के मौजगिरी आश्रम में जूना अखाड़े के साधु-संतों की मौजूदगी में महामंडलेश्वर की उपाधि दी गई |

बताया जा रहा है कि सनातन संस्कृति के इतिहास में किसी दलित को महामंडलेश्वर उपाधि देने का अखाड़े का यह पहला निर्णय है| जूना अखाड़ा के संत पंचानन गिरी ने बताया कि सनातन धर्म में बड़े पैमाने पर कुरीतियां रही हैं, जिससे धर्म का पतन हो रहा था| कुरीतियों को रोकने के लिए जूना अखाड़े ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की सहमति से ही दलित संत को धर्माचार्य की पदवी देने के लिए उनका संस्कार कराया है|

उन्होंने आगे कहा कि सनातन धर्म में कई दलित संत हुए, जिनका हमेशा सम्मान किया गया है| अभी भी सनातन धर्म को बचाने के लिए योग्य दलित को भी धर्माचार्य पद के लिए घोषित किया जा रहा है|

कन्हैया प्रभुनंदगिरी बने दलित संत का कहना है कि उन्होंने कभी ऐसी कल्पना भी नहीं की थी कि वे धर्माचार्य के पद पर कभी आसीन हो सकते हैं| हिन्दू धर्म के ग्रन्थों में कन्हैया कुमार कश्यप की गहरी रुचि रही है, जिसके चलते उन्होंने संस्कृत विषय से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 2016 के उज्जैन से सिंहस्थ कुंभ में पंचानन गिरी से दीक्षा लेकर संन्यास लिया था|

Share.