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सावधान! कहीं आप भी तो नहीं लगाते घास-पत्थर वाले जीरे से तड़का

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हमने अक्सर फिल्मों में या किसी की लड़ाई के दौरान सुना होगा कि ‘मैं तुझे कुत्ते कि मौत मारूँगा’, लेकिन अब शायद हम सभी जीरे (Fake Cumin) की मौत मरने वाले हैं! यदि आप जीरे की मौत नहीं मारना चाहते हैं  तो यह खबर जरूर पड़ें। मुनाफा कमाने की लालच में आजकल मिलावट खोरों का व्यापार खूब फल रहा है। हमने दूध, शक्कर, आटा, मिर्च पाउडर, दाल चावल जैसे कई खाद्य पदार्थों में मिलावट के बारे में तो सुना था, लेकिन क्या कभी आपने जीरे में मिलावट के बारे में सुना है? पुलिस के हाथों ऐसा जीरा लगा है, जिसके बारे में सुनकर आपके होश उड़ जाएँगे। जिसे देखकर कोई भी असली और नकली का फर्क  नहीं कर पाएगा।

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 झाड़ू, पत्थर पाउडर और गुड़ का सीरा से बनता है जीरा

दिल्ली के बवाना में पुलिस ने जीरा बनाने की फैक्ट्री पोर छापामार कार्रवाई की। जहां पर जंगली घास (जिससे फूल झाड़ू बनती है), गुड़ का शीरा और पत्थर पाउडर से जीरा बनाया जाता था। इस जीरे को दिल्ली के साथ ही  गुजरात (Gujarat), राजस्थान (Rajasthan) उत्तरप्रदेश (UP) मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में बेचा जाता था। नकली जीरे को असली जीरे मे मिलाकर बेचा जाता था। पुलिस ने पाँच आरोपियों को पकड़ा है, जिनके पास से 19,400 किलो नकली जीरा, 5250 किलो पत्थर पाउडर,1600 किलो फूल झाडू़ की घास और 1225 किलो गुड़ का सीरा मिला है।  आरोपियों का कहना है कि इस काम में लागत 1 रुपए और मुनाफा सौ रुपए का होता है। आरोपी 20 रुपए किलों के हिसाब से व्यापारियों को जीरा बेचते थे।

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कैसे बनता है नकली जीरा ?

नकली जीरा बनाने के लिए झाड़ू की घास निकालकर गुड के गर्म सीरे में डाल दिया जाता था। अच्छे से मिलाने के बाद इन्हें सुखाया जाता है। इसके बाद पत्थर का पाउडर मिलाया जाता है। मिक्स सामान को छलनी से छानकर बाद में सुखाकर नकली जीरा तैयार करते थे। यह जीरा धीमे जहर के जैसे काम करता है। इसे खाने से कई तरह की बीमारियाँ भी हो सकती है। पुलिस का कहना है कि नकली जीरे का काला कारोबार अन्य स्थानों पर भी हो सकता है।

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   – Ranjita Pathare 

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