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क्या होते हैं इलेक्टोरल बॉन्ड, क्यों बने हैं विवादों में ? जानिए सब कुछ

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देश में कई मुद्दे चर्चा का विषय बने हुए हैं, इन्हीं में से एक है इलेक्टोरल बॉन्ड (Electoral bond ) का मुद्दा , जो सदन में हंगामे से लेकर विपक्ष के सभी नेताओं की ज़ुबान पर चढ़ा हुआ है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार के फैसले के बाद इलेक्टोरल बॉन्ड यानी चुनावी चंदा हासिल करने वाले बॉन्ड एक बार फिर विवादों में आ गए हैं। इन बॉन्‍ड को औपचारिक भ्रष्टाचार का स्रोत बताते हुए कांग्रेस समेत विरोधी दल के कई नेता इसका विरोध कर रहे हैं।

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क्या होते हैं  इलेक्टोरल बॉन्ड

इलेक्टोरल बॉन्ड (Electoral bond ) के माध्यम से व्यक्ति, संस्थाएं, भारतीय और विदेशी कंपनियाँ भारतीय राजनीतिक दलों  को चन्दा दे सकती है। सरकार ने इस दावे के साथ साल 2018 में इस बॉन्ड की शुरुआत की थी कि इससे राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी और साफ-सुथरा धन आएगा। इससे कालेधान पर लगाम लगेगी। सरकार का कहना है कि दो हजार से ज्यादा की राशि नकद में नहीं दी जा सकती इसीलिए बॉन्ड जारी किए जाएँगे, जिससे की धनराशि का लेनदेन बैंक के माध्यम से ही होगा। इसमें बॉन्‍ड पर दानदाता का नाम नहीं होता है, और पार्टी को भी दानदाता का नाम नहीं पता होता है। इससे दानदाता कर में छुट भी ले सकते हैं। केवल बैंक को ही इस बात की जानकारी होगी कि यह चन्दा किसने दिया है। इन बॉन्‍डों को जनप्रतिनिधित्व कानून-1951 की धारा 29ए के तहत पंजीकृत वे राजनीतिक पार्टियां ही भुना सकती हैं, जिन्हें पिछले आम चुनाव या विधानसभा चुनाव में कम से कम एक फीसद वोट हासिल हुआ हो।

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क्यों हो रहा विवाद

इन बॉन्ड को जारी करने से पहले रिजर्व बैंक ने सरकार को चेताया था और सलाह दी थी कि इन्हें इश्यू न करें, लेकिन मोदी सरकार ने रिजर्व बैंक कि सभी सलाह को दरकिनार करते हुए बॉन्ड जारी करने का फैसला सुना दिया। आरबीआइ ने 30 जनवरी, 2017 को लिखे एक पत्र में कहा था कि यह योजना पारदर्शी नहीं है, मनी लांड्रिंग बिल को कमजोर करती है और वैश्विक प्रथाओं के खिलाफ है। इससे केंद्रीय बैंकिंग कानून के मूलभूत सिद्धांतों पर ही खतरा उत्पन्न हो जाएगा। भारतीय स्टेट बैंक की 29 शाखाओं को इलेक्टोरल बॉन्ड जारी करने और उसे भुनाने का अधिकार दिया गया है।

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कैसे काम करते हैं इलेक्टोरल बॉन्ड

जिसे भी ये बॉन्ड खरीदने हैं वे बॉन्ड जारी होने से लेकर 10 दिन के अंदर इसे एसबीआई की निर्धारित शाखाओं से खरीद सकते हैं । इनकी वैधता जारी होने की तिथि से 15 दिनों कि रहेगी। इन्हें 1000 रुपए, 10000 रुपए, एक लाख रुपए, 10 लाख रुपए और 1 करोड़ रुपए के गुणकों में जारी किया जाएगा। इन्हें नकद में नहीं खरीदा जा सकता है और सबसे जरूरी बात कि जिसे भी इन  बॉन्ड को खरीदना है, उन्हें बैंक में केवाईसी फॉर्म जमा करना होगा।

    – Ranjita Pathare 

 

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