दिल्ली हिंसा में 85 वर्षीय महिला को जलाया और उसका घर भी लूट लिया

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दिल्ली में लगातार बढ़ रही हिंसा (Delhi Violence)  और उपद्रव के बीच अब कई तरह की खबरें (85 Year Old Burned Alive) भी निकलकर सामने आ रही है। दिल्ली में हिंसा (Delhi riots 2020) के पीछे उद्देश्य क्या था और क्यों दिल्ली में इस तरह के हालात बने, इसकी हकीकत इन दंगों से पीड़ित लोग ही बयां कर रहे हैं। दिल्ली के ही एक शख्स हैं मोहम्मद सईद सलमानी (Mohammad Saeed Salmani)  जिनका इस दंगे में सब कुछ बर्बाद (ruined everything in Delhi Riots) हो गया। वे दिल्ली के शाहदरा गमरी एक्सटेंशन क्षेत्र में रहते हैं। 48 वर्षीय सलमानी का रेडिमेड व्यवसाय का काम है। 25 फरवरी को मो. सईद सलमानी दूध लेने के लिए अपने घर से बाहर गए थे। तब उन्हें अपने बेटे का काॅल आया कि करीब 100 लोग उनकी गली में घुस आए हैं। ये लोग घर और दुकानों को आग लगा रहे हैं। उन्होंने उनके 4 मंजिला घर को भी आग लगा दी है। वे जैसे-तैसे अपनी जान बचाने के लिए छत पर आ गए हैं।

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ये काॅल सुनकर सलमानी अपने घर के लिए जाने लगे, लेकिन दंगों (Delhi Burns) के चलते लोगों ने उन्हें रोक दिया। अगर (85 Year Old Burned Alive) यहां तक भी होता तो ठीक था, लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने सलमानी से उनका सबकुछ छीन लिया। डनकी माताजी का नाम अकबारी था, जिनकी उम्र 85 वर्ष थी। वे उनके उसी घर में तीसरे फ्लोर पर थी। घर में लगी आग में उनकी मौत हो गई। उपद्रवियों ने उनके घर से 8 लाख रुपए लूट लिए, उनकी ज्वेलरी भी लूट ली गई। दंगे की आग में उनकी कुरआन भी जला दी। वहीं क्षेत्र की मस्ज़िद भी दंगाईयों द्वारा तोड़ दी गई। सलमानी चूंकि एक छोटे रेडिमेट व्यापारी थे, इसलिए उनकी जमा पूंजी उनके घर में ही थी, जो कि आग में खाक हो गई। दंगे (Delhi Is Burning)  ने उनसे उनकी मां भी छीन ली। सलमानी के मुताबिक अब उनकी जिंदगी बर्बादी की कगार पर आ गई है। दंगे ने उनसे उनका सब कुछ ले लिया है।

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उनकी मां (85 Year Old Burned Alive) की बाॅडी जीटीबी हाॅस्पिटल में पोस्टमार्डम के लिए भेजी गई है, जिसका पोस्टमार्टम अगले सोमवार तक होगा। सलमानी की तरह ही गमरी एक्सटेंशन के अन्य पीड़ितों का कहना है कि मीडिया और पुलिस (Delhi Police) ने हमारे क्षेत्र में ध्यान नहीं दिया। जब मदद की जरुरत थी तब कोई हमारे पास तक नहीं आया। ये कहानी हमने आपको इसलिए दिखाई, क्योंकि जब दंगों की आग फैलती है तो उसकी लपटें यह नहीं देखती कि वह किसी बुजुर्ग को जला रही है, या किसी बच्चे को। वह हिंदू को जला रही है या मुस्लिम को। वह तो दंगा है और उसकी चपेट में हर कोई आता है। मुस्लिम परिवारों को जलाने वाले ज़रा ये भी सोचें कि यह आग कभी उनके घरों पर भी लग सकती है। यदि हम सभी से बराबरी का मुकाबला करने लगेंगे तो फिर इस लड़ाई में कोई बचेगा ही नहीं जो यह देख सके कि इस लड़ाई में कौन बचा है?

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Rahul Tiwari / Prabhat Jain

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