7 साल बाद निर्भया को न्याय, बलात्कारियों को फांसी

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देश को जिस फैसले का इंतजार था आखिर वो फैसला आज हो गया। जिस निर्भया को न्याय (Justice for Nirbhaya) दिलाने के लिए साल 2012 में राजधानी दिल्ली समेत पूरे देश में कैंडिल मार्च निकला गया आज 7 साल 4 महीनों के बाद उसे आखिरकार न्याय मिल गया। निर्भया के चारों दोषियों (Justice for Nirbhaya) को आज सुबह तय समय 5 बजकर 30 मिनट पर फांसी पर लटका दिया गया। इस लंबी लड़ाई में दोषियों ने कई तिकड़मबाजी की और फांसी से बचने की कोशिश की लेकिन कहते हैं न कि ऊपर वाले के घर देर है अंधेर नहीं। देर से ही सही लेकिन न्याय हुआ। पहले 3 बार दोषियों को डेथ वारंट जारी किए जाने के बाद भी फांसी टाल दी गई। सुप्रीम कोर्ट भी इस बात से काफी खफा था। बात ये नहीं थी कि उसके आदेश की अवहेलना की जा रही थी बात थी न्याय की, भरोसे की, इन्साफ की, जो लोगों का न्याय व्यववस्था पर था। धीरे-धीरे इसमें गिरावट आ रही थी और लोग हैदराबाद गैंगरेप केस में हुए एनकाउंटर को सही बताने लगे थे। सही भी है जब अपराध सिद्ध होने के बाद भी दोषियों की फांसी को बार-बार टाला जाए तो लोगों का न्याय व्यवस्था से विश्वास उठना लाजिमी है। हालांकि न्याय के मंदिर सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों को सजा-ए-मौत का फरमान सुनाया और उसी के तहत आज चारों आरोपियों को फांसी के फंदे पर लटकाया गया।

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निर्भया के दोषियों का फांसी देने से पहले मेडिकल टेस्ट किया गया, जिसमें सभी फिट और स्वस्थ थे। इसके बाद तिहाड़ जेल में फांसी की प्रक्रिया पूरी कर उन्हें सजा-ए-मौत दी गई। इस दौरान तिहाड़ जेल को लॉक डाउन कर दिया गया था और जेल के बाहर अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया था। मेरठ से आए जल्लाद पवन ने अपना काम पूरा किया और चारों को फांसी के फंदे पर लटका दिया। दोषियों को फांसी दिए जाने के बाद निर्भया की मां आशा देवी मीडिया से कहा कि “जैसे ही मैं सुप्रीम कोर्ट से लौटी, बेटी की तस्वीर को गले से लगाया और कहा कि आज तुम्हें इंसाफ मिल गया।” निर्भया की मां ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को लेकर खुशी जाहिर की।

फांसी से पहले आधी रात को दिल्ली हाईकोर्ट में चली सुनवाई में निर्भया के दोषियों की तरफ से फांसी पर रोक की याचिका लगाकार रोक की मांग की गई लेकिन, दिल्ली हाईकोर्ट ने किसी तरह की राहत से इनकार कर दिया। उसके बाद निर्भया के गुनहगारों के वकील ने एपी सिंह ने सप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। यहां जस्टिस भानुमति की 03 सदस्यीय बेंच में एपी सिंह ने राष्ट्रपति की तरफ से खारिज पवन की दया याचिका पर पुनर्विचार और फांसी पर स्टे की मांग की। इसके साथ ही, पवन को नाबालिग साबित करने के लिए कोर्ट के सामने स्कूल सार्टिफेकेट और अटैंडेंस रजिस्टर रखे गए। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन चीजों पर पहले ही बहस हो चुकी है। अब इन सब दलीलों और याचिकाओं का कोई मतलब नहीं रह जाता। जस्टिस भानुमति की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए एपी सिंह से कहा कि आपने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया। जस्टिस भानुमति ने कहा- ‘‘हम इस राय पर पहुंचे हैं कि इस केस में कोई मेरिट नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने लगातार इसे बरकार रखा है कि राष्ट्रपति की तरफ से दया याचिका खारिज होने के बाद उसकी समक्षी का गुंजाइश कम रह जाती है।‘‘

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इसके बाद एपी सिंह मीडिया के सामने भी आए और अपनी बात रखी, लेकिन इस दौरान उन्होंने विवादित बयान भी दिया। उन्होंने निर्भया की मां आशा देवी को सजा दिए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि निर्भया की मां को ये तक नहीं पता था कि रात 12 बजे तक उनकी बेटी कहां थी, किसके साथ किस हालात में थी। बता दें दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 रविवार की रात चलती बस में निर्भया के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। यह घटना उस वक्त हुई, जब निर्भया फिल्म देखने के बाद अपने मित्र के साथ बस में सवार होकर मुनीरका से द्वारका जा रही थी। उसके बस में बैठते ही लगभग पांच से सात यात्रियों ने उसके साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी। उस बस में और यात्री नहीं थे। उसके मित्र ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन उन लोगों ने उसके साथ भी मारपीट की और निर्भया के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और उसके बाद उसके साथ बर्बरता की। बाद में दोषियों ने निर्भया और उसके मित्र को दक्षिण दिल्ली के महिपालपुर के नजदीक वसंत विहार इलाके में चलती बस से फेंक दिया। 05 मार्च को निचली अदालत ने मुकेश सिंह (32), पवन गुप्ता (25), विनय शर्मा (26) और अक्षय कुमार सिंह (31) को 20 मार्च को सुबह साढ़े पांच बजे फांसी देने के लिए नया डेथ वारंट जारी किया था। चारों आरोपियों के सभी कानूनी विकल्प समाप्त हो चुके थे और उन्हें फांसी दे दी गई।

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Prabhat Jain

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