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हैवानियत की हद पार, दलित के हाथ-पैर काटकर ज़िंदा जलाया

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आज़ादी के कई दशक बीत चुके हैं, लेकिन आज भी देश में ऐसे कई मामले सामने आ रहें हैं, जो दलितों और निम्न जाति के लोगों पर हो रहे अत्याचारों की हद दर्शाते हैं। भारतीय संविधान (Indian Constititution) में अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) और जनजाति ((Tribe) के साथ होने वाले शोषण (exploitation) और अत्याचार को रोकने के लिए सख्त कानून बनाये गए हैं। बावजूद इसके कुछ ऐसी घटनाएं (Farmer Burnt Alive In Pratapgarh) सामने आती हैं, जो दिल दहला देने वाली होती हैं।

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दरअसल, हाल ही में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के प्रतापगढ़ (Pratapgarh) ज़िले में दलित की हत्या (Farmer Burnt Alive In Pratapgarh) की एक सनसनीखेज़ वारदात सामने आई है। घटना प्रतापगढ़ ज़िले के पट्टी कोतवाली इलाके के बेलारामपुर गांव की है। कुछ लोगों ने पंपिंगसेट (pumping set) पर सो रहे दलित किसान के हाथ-पैर काटने के बाद उसे चारपाई से बांधकर जिंदा फूंक दिया (murder dalit burnt alive)। दलित किसान का शव पूरी तरह जल चुका था। वारदात की ख़बर फैलते ही स्थानीय लोगों में तनाव का माहौल बन गया। कुछ ही देर में पुलिस भी मौके पर पहुँच गई, लेकिन गांव वालों ने पुलिस अधिकारियों को शव उठाने से इनकार कर दिया।

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क्या थी घटना (Farmer Burnt Alive In Pratapgarh)?

सूत्रों के मुताबिक, बेलारामपुर निवासी विनय कुमार सरोज उर्फ बबलू (33) पुत्र शोभनाथ सरोज खेती (farming) करने के साथ-साथ सुअर पालने (pig farm) का व्यवसाय भी करता था। रविवार की रात (Sunday night) शोभनाथ परिवार के साथ भारत-पाकिस्तान (India-Pakistan match) का मैच देख रहा था। मैच खत्म होते ही वह घर से करीब तीन सौ मीटर (300 meter) दूर खेत में लगे पपिंगसेट पर धान की रखवाली करने चला गया।

जहाँ पर उसका सुअरबाड़ा भी था। दूसरे दिन यानी सोमवार (Monday) को करीब पांच बजे विनय का भाई ओमप्रकाश भी वहां पहुंचा। उसे कुछ ही दूर ओमप्रकाश को पपिंगसेट (pumping set) के पास बने छप्पर से धुआं उठता दिखा, जैसे ही वह वहां पहुंचा उसने देखा कि उसके भाई विनय का शव जल रहा था। उसे चारपाई से बांधा गया था और हाथ-पैर कटे हुए थे। यह देखकर उसके होश उड़ गए और उसने शोर मचाया। चीख-पुकार सुनकर गांव वाले मौके पर पहुंचे। पुलिस को सूचना दी गई और कुछ ही देर में पुलिस घटनास्थल पर पहुँच गई।

पुलिस ने जैसे ही शव (deadbody) उठाने की कोशिश की तो लोगों ने पुलिस को रोक दिया और सीधे डीएम (DM) को बुलाने की मांग की। कुछ घंटो बाद डीएम घटनास्थल पर पहुंचे और लोगों को कार्रवाई (investigation) का आश्वासन दिया। फिर पुलिस ने शव पोस्टमॉर्टम (postmortem) के लिए भेजा। फिलहाल जाँच जारी है और डीएम ने हत्या की सख्त कार्रवाई कर हत्यारों को जल्द से जल्द पकड़ने का आदेश दिया है।

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देश में कुल कितने फीसदी दलित?

भारत की कुल आबादी का 16.6 फ़ीसद (percent) दलित हैं, लेकिन आज भी ग्रामीण इलाकों में दलितों पर होने वाले अत्याचारों की संख्या कम नहीं हो रही है। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए केवल सख्त कानून (strict laws) नहीं बल्कि समाज में जागरूकता (awareness) की भी ज़रूरत है।

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