बर्खास्त IPS अधिकारी संजीव भट्ट को उम्रकैद

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पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट (Indian police officer Sanjiv Bhatt ) को 30 साल पुराने मामले में अब उम्रकैद (Life imprisonment) की सजा सुनाई गई है। संजीव भट्ट (Sanjiv Bhatt) ने 2002 गुजरात दंगे (2002 Gujarat riots) पर सवाल उठाए थे। अब उन्हें हिरासत में मौत (कस्टोडियल डेथ) से जुड़े एक मामले में सज़ा मिली है। वर्ष 1990 में जामनगर (Jamnagar) में भारत बंद के दौरान हिंसा हुई थी। उस समय संजीव भट्ट जामनगर के एएसपी थे। तब पुलिस ने 133 लोगों को गिरफ्तार किया था, इसमें 25 लोग घायल हुए थे और आठ लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

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 हिंसा के बाद गिरफ्तार किये गए लोगों में से एक व्यक्ति की जेल में मौत हो गई थी। आरोपी प्रभुदास माधवजी वैश्नानी की मौत के बाद भट्ट (Sanjiv Bhatt) और उनके सहयोगियों पर पुलिस हिरासत में मारपीट का आरोप लगा था। इसके बाद से ही यह मामला चलते आ रहा है। पहले जब मामला दर्ज किया गया तो गुजरात सरकार (Government of Gujarat) ने मुकदमा चलाने की इजाजत नहीं दी, लेकिन 2011 में राज्य सरकार ने भट्ट के खिलाफ ट्रायल की अनुमति दे दी।

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संजीव भट्ट (Indian police officer Sanjiv Bhatt ) को बगैर अनुमति के ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और सरकारी वाहन का दुरुपयोग करने के आरोप में 2011 में निलंबित किया गया था और बाद में अगस्त, 2015 में उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। वे 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी थे। उन्होंने 2002 में गुजरात दंगों में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका पर सवाल खड़े किए थे। संजीव भट्ट सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर करने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गए थे। उन्होंने कहा था कि गुजरात में वर्ष 2002 में हुए दंगों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) में उन्हें भरोसा नहीं है।


पीएम मोदी पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा था कि गोधरा कांड के बाद 27 फरवरी, 2002 की शाम में मुख्यमंत्री की आवास पर हुई बैठक में वे मौजूद थे, जिसमें मोदी ने कथित तौर पर पुलिस अधिकारियों से कहा था कि हिंदुओं को अपना गुस्सा उतारने का मौका दिया जाना चाहिए।

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