इस दवा से ख़त्म होगा Coronavirus!

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पूरी दुनिया में Coronavirus कहर बरपा रहा है। इसका इलाज खोजने में दुनियाभर के डॉक्टर्स जुटे हुए हैं। अमेरिका ने एक वैक्सीन (Coronavirus Patients Recovered) भी तैयार कर ली है जिसका परीक्षण किया जा रहा है। इस वैक्सीन के परीक्षण पर दुनियाभर की निगाहें लगी हैं, लेकिन इन सबके बीच देश के राजस्थान राज्य की राजधानी जयपुर का सवाई मानसिंह अस्पताल (SMS) सुर्ख़ियों में छाया हुआ है। कारण है कोरोना पॉजिटिव मरीज़ों का इलाज। बिना किसी वैक्सीन के, बिना किसी दवा के आखिर कैसे इलाज संभव हुआ? वो कौन सी दवा है जिसने ये कारनामा कर दिखाया? इसी वजह से सुर्ख़ियों में आ गया जयपुर का सवाई मानसिंह अस्पताल। लेकिन जिस दवा का इस्तेमाल इस अस्पताल में किया गया उसे अमेरिका और चीन जैसे देश पहले ही इस्तेमाल कर चुके हैं। वहीं अस्पताल में कोरोना के मरीजों के ठीक हो जाने के बाद अस्पताल को लगातार दूसरे देशों से इस संबंध में फ़ोन आ रहे हैं। सवाई मानसिंह अस्पताल में रेट्रोवायरल ड्रग का इस्तेमाल कर कोरोना के मरीजों को ठीक किया गया।

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बता दें इस अस्पताल कोरोना वायरस (Coronavirus Patients Recovered)  से संक्रमित में 3 मरीज दाखिल हुए थे। इनमे से 2 मरीज इटली से जयपुर आए थे जबकि एक मरीज जयपुर का ही था। वायरस से संक्रमित मरीज की उम्र 85 साल बताई गई है। इलाज के बाद सवाई मानसिंह अस्पताल ने दावा किया कि मरीजों की रिपोर्ट निगेटिव पाई गई। हालांकि अभी भी सभी मरीजों को डॉक्टरों की गहन निगरानी में आइसोलेशन में ही रखा जाएगा। यह दावा किया अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ डीएस मीणा ने।

कैसे काम करता रेट्रोवायरल ड्रग

Coronavirus एक दम नई वीमारी है और इसका इलाज अभी तक नहीं मिला है। लेकिन इस वायरस का मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर, एचआईवी वायरस के स्ट्रक्चर से मेल खाता है। (Coronavirus Patients Recovered)  मतलब दोनों के मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर एक जैसे हैं। इसी वजह से इस वायरस से संक्रमित मरीज़ों को ये एंटी ड्रग दिए गए। एचआईवी एंटी ड्रग लोपिनाविर (LOPINAVIR) और रिटोनाविर (RITONAVIR) एंटी ड्रग मरीजों को दिए जाने का निर्णय वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम ने लिया था और यह सही साबित हुआ। इसे रेट्रोवायरल ड्रग भी कहा जाता है। जिस टीम ने यह फैसला लिया उसमें शामिल डॉक्टर सुधीर ने कहा, “SARS के मरीज़ों में भी इस ड्रग का इस्तेमाल पहले किया जा चुका है। कोरोना वायरस भी एक वायरस से फैलने वाली बीमारी है। कोरोना का वायरस इसी परिवार का वायरस है जो म्यूटेशन से बना है।”

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हालांकि इस ड्रग के इस्तेमाल को लेकर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने एक गाइडलाइन जारी की है। इसमें बताया गया है कि किन मरीज़ों पर इस ड्रग (Coronavirus Patients Recovered)  का इस्तेमाल किया जा सकता है। डॉ डीएस मीणा का कहना है कि अस्पताल में ICMR की गाइडलाइन के मुताबिक़ ही इस ड्रग का इस्तेमाल किया गया। डॉ. मीणा ने कहा कि गाइडलाइन में यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि ‘कॉमप्रोमाइज्ड’ मरीज़ों को ही यह ड्रग दिया जा सकता है।

कौन होते हैं कॉमप्रोमाइज्ड’ मरीज़

डॉ. डीएस मीणा से पूछने पर उन्होंने बताया कि, “ऐसे मरीज़ जिनकी उम्र 60 साल से ऊपर है और साथ में उन्हें डायबटीज़ हो, दिल की बीमारी हो, उन्हीं में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। कम उम्र वाले लोग जिन्हें बाक़ी किसी दूसरे तरह की परेशानी नहीं होती उन पर इस ड्रग का इस्तेमाल फ़िलहाल नहीं किया जा रहा है।” राजस्थान में वायरस (Coronavirus Patients Recovered)  से संक्रमित 4 मरीजों में से 3 मरीज ‘कॉमप्रोमाइज्ड’ मरीज़ थे। इनके इलाज के लिए डॉक्टरों की विशेष टीम का गठन किया गया। इस टीम ने ही मरीजों का इलाज किया और अब उन्हें निगरानी में ही रखकर आगे का इलाज जारी रखा। हालांकि चौथे मरीज की उम्र कम होने की वजह से उसे यह ड्रग नहीं दिया गया था। लेकिन मंगलवार को आईसीएमआर (ICMR) की गाइडलाइन और डॉक्टरों की विशेष टीम की सलाह पर चौथे मरीज को भी रेट्रोवायरल ड्रग दिया गया है।

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Prabhat Jain

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