Corona के साइड इफेक्ट से पूरी दुनिया पर ये असर होगा

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कोरोना से अब तक की अपडेट-

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया के 186 देशों में पहुँचा कोरोना वायरस (Coronavirus Havoc) ।

दुनिया भर में 4 लाख 20 हजार से ज्यादा लोग कोरोना वायरस (Coronavirus India) से संक्रमित।

मरने वालों की संख्या 20,000 के पार हो गई है।

01 लाख से अधिक लोग बीमारी से पूरी तरह ठीक हुए।

भारत में कोविड-19 (COVID-19) के 500 से ज्यादा मामले पाए गए जिनमें से 9 लोगों की मौत हुई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे भारत में 21 दिनों तक लॉकडाउन (Coronavirus Lock Down) की घोषणा की।

भारत में 22 राज्यों के 75 जिलों में कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई।     महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, दिल्ली-एनसीआर और उत्तरप्रदेश सबसे अधिक प्रभावित।

अगर विश्व की बात करें तो-

इटली में मंगलवार के दिन करीब 743 लोगों की मौत, मरने वालों की कुल संख्या 6,820 हुई।

चीन के बाद इटली (Coronavirus Italy) , अमरीका, स्पेन, जर्मनी, ईरान, फ्रांस और दक्षिण कोरिया में कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus Positive Cases) के सबसे अधिक मामले दर्ज हुए।

भारत सरकार ने सरकारी और निजी संस्थानों से कहा- न वेतन काटें, न छंटनी करें।

कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए पूरे देश में 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा हो गई है। इसमें जरूरी सेवाओं के अलावा सभी सेवाएं बंद रहेंगी। कारोबार थम गया है, दुकानें बंद हैं, आवाजाही पर रोक है। ऐसे में कोरोना का हमला सिर्फ हम पर ही नहीं हो रहा है बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को भी यह वायरस अपनी चपेट में पूरी तरह से लेने की तैयारी में है। बीते साल की ही बात करें तो ऑटोमोबाइल सेक्टर, रियल स्टेट, लघु उद्योग समेत असंगठित क्षेत्र में सुस्ती छाई हुई थी। बैंक एनपीए की समस्या से अब तक निपट रहे हैं। सरकार निवेश के जरिए, नियमों में राहत और आर्थिक मदद देकर अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने की कोशिश कर रही थी। इस बीच कोरोना वायरस के चलते पैदा हुए हालात ने जैसे अर्थव्यवस्था का पहिया जाम कर दिया है। ना तो कहीं उत्पादन है और ना मांग, लोग घरों में हैं और दुकानों पर ताले लगे हैं। अब आने वाले दिनों में हमारी अर्थव्यवस्था किधर जा सकती है, आईये एक नज़र इस पर भी डालते हैं।

घटा जीडीपी वृद्धि का अनुमान

अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने एक अप्रैल से शुरू हो रहे वित्तीय वर्ष (2020-21) के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के वृद्धि दर अनुमान को घटाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे पहले 6.5 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान लगाया था। ये रेटिंग्स सोमवार को जारी की गई हैं। इससे अगले साल 2021-22 के लिए रेटिंग एजेंसी ने 6.9 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान लगाया है। इससे पहले ये अनुमान 7 प्रतिशत था। स्टैंडर्ड एंड पुअर्स के मुताबिक, एशिया-प्रशांत क्षेत्र को कोविड-19 से करीब 620 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है।

थमा कारोबार-

लॉकडाउन (21Days Lock Down) का सबसे ज्यादा असर अनौपचारिक क्षेत्र पर पड़ेगा और हमारी अर्थव्यवस्था का 50 प्रतिशत जीडीपी अनौपचारिक क्षेत्र से ही आता है। इसमें फेरी वाले, विक्रेता, कलाकार, रिक्शा चालक, मोची, अटाले वाले ऐसे छोटे लोग, लघु उद्योग और सीमापार व्यापार शामिल हैं। इस वर्ग से सरकार के पास टैक्स नहीं आता। ये क्षेत्र लॉकडाउन के दौरान काम नहीं कर सकता है। वो कच्चा माल नहीं खरीद सकते, बनाया हुआ माल बाजार में नहीं बेच सकते तो उनकी कमाई बंद ही हो जाएगी।

बीमार लोगों पर असर-

जो लोग बीमार हैं वो काम नहीं कर सकते। कितने ही लोग सेल्फ आइसोलेशन में हैं। जिनका अपना कारोबार या दुकान है वो बीमारी के कारण उसे चला नहीं पाएंगे। जो खर्चा बीमारी के ऊपर होगा वो बचत से ही निकाला जाएगा। अगर ये वायरस नियंत्रण में नहीं आया तो ये असर और कहीं ज्यादा हो सकता है।

इन कंपनियों पर पड़ेगा असर-

लॉकडाउन से कंपनियों में काम नहीं होगा और काम न होने से व्यापार रुकेगा और अर्थव्यवस्था भी रुकेगी। लोग जब घर पर बैठते हैं, टैक्सी बिजनेस, होटल सेक्टर, रेस्टोरेंट्स, फिल्म, मल्टीप्लेक्स सभी प्रभावित होते हैं। जिस सर्विस के लिए लोगों को बाहर जाने की जरूरत पड़ती है उस पर बहुत गहरा असर पड़ेगा।

ये सेक्टर होंगे सबसे ज्यादा प्रभावित

लॉकडाउन और कोरोना वायरस के दौरान सबसे ज्यादा असर एविएशन, पर्यटन, होटल सेक्टर पर पडेगा। एविएशन सेक्टर का सीधा-सा हिसाब होता है कि जब विमान उड़ेगा तभी कमाई होगी लेकिन फिलहाल अंतरराष्ट्रीय यात्राओं पर रोक लगा दी गई है। घरेलू उड़ानें भी सीमित हो गई हैं। लेकिन, कंपनियों को कर्मचारियों का वेतन देना ही है। भले ही वेतन 50 प्रतिशत कम क्यों न कर दें। हवाई जहाज का किराया देना है, उसका रखरखाव भी करना है और कर्ज भी चुकाने हैं। वहीं, पर्यटन जितना ज्यादा होता है हॉस्पिटैलिटी का काम भी उतनी ही तेजी से बढ़ता है। लेकिन, अब आगे लोग विदेश जाने में भी डरेंगे। अपने ही देश में खुलकर घूमने की आदत बनने में ही समय लग सकता है। ऐसे में पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी के क्षेत्र को बहुत बड़ा धक्का पहुंचेगा। सबसे बड़ी बात है कि ये महीने बच्चों की छुट्टियों के हैं लेकिन लोग कहीं घूमने नहीं जाएंगे। बैंकिंग सेक्टर की बात करें तो जो अच्छा बैंक है उसे ज्यादा समस्या नहीं होनी चाहिए। बैंक का कोराबार ये होता है कि वो पैसा जमा करते हैं और लोन देते हैं। लेकिन, अभी बहुत ही कम लोग होंगे जो बैंक से लोन ले रहे होंगे। इससे कमजोर बैंकों का बिजनेस ठप्प पड़ सकता है। कई लोगों का कर्ज लौटान भी मुश्किल हो सकता है जिससे बैंकों का एनपीए भी बढ़ जाए।

नौकरियों पर खतरा

इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन के अनुसार- ‘‘कोरोना वायरस सिर्फ एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट नहीं रहा, बल्कि ये एक बड़ा लेबर मार्केट और आर्थिक संकट भी बन गया है जो लोगों को बड़े पैमाने पर प्रभावित करेगा।‘‘ दुनियाभर में ढाई करोड़ नौकरियां खतरे में हैं।

दोहराएगी 2009 की मंदी-

कोरोना (Coronavirus) का यह दौर 2008 की मंदी जैसा नज़र आ रहा है। दुनिया ने 2008 की मंदी का दौर भी देखा था जब कंपनियां बंद हुईं और एकसाथ कई लोगों को बेरोजगार होना पड़ा। 2008 के दौर में कुछ कंपनियों को आर्थिक मदद देकर संभाला गया। लेकिन, आज अगर सरकार ऋण दे तो उसे सभी को देना पड़ेगा। हर सेक्टर में उत्पादन और खरीदारी प्रभावित हुई है। कोरोना वायरस का असर पूरी दुनिया पर पड़ा है। चीन और अमरीका जैसे बड़े देश और मजबूत अर्थव्यवस्थाएं इसके सामने लाचार हो गए हैं। इससे भारत में विदेशी निवेश के जरिए अर्थव्यवस्था सुदृढ़ करने की कोशिशों को भी धक्का पहुंचेगा। विदेशी कंपनियों के पास भी पैसा नहीं होगा तो वो निवेश में रूचि नहीं दिखाएंगी। कुल मिलाकर कोरोना ने सिर्फ हमारे स्वास्थ्य की रीढ़ तोड़ने का काम नहीं किया है, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी पंगु बना दिया है। जिस तरह से लोग सेल्फ आईसोलेशन में है। हमारी अर्थव्यवस्था भी बिस्तर पर आ चुकी है। सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है। पहली यह कि अपने देशों में लाशों का ढेर लगने से कैसे रोका जाए, दूसरा यह कि उखड़ी हुई पटरी को फिर से बिछाकर उस पर अर्थव्यवस्था की रेल कैसे दौड़ाई जाए।

Rahul Tiwari / Prabhat

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