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चमकी बुखार से दम तोड़ते मासूम और फिसलती नेताओं की ज़ुबान

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चमकी बुखार (Leaders Controversial Statement On Chamki Fever ) के कारण बिहार (bihar ) में हाहाकार मचा हुआ है। एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम (Acute encephalitis syndrome), दिमागी बुखार और चमकी बुखार के नाम से पहचाने जाने वाली इस बीमारी के कारण 130 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई। बुखार के कारण दम तोड़ते मासूम, रोते बिलखते परिजन को देखकर पूरा देश शोक में है, लेकिन ऐसे मौके पर भी नेताओं की ज़ुबान पर लगाम नहीं लग रही है।

VIDEO : चमकी बुखार पर हो रही बैठक में नीतीश के मंत्री ने उड़ाया मज़ाक

पहले तो नेताओं ने दम तोड़ते बच्चों की कोई सुध नहीं ली और जब वे बच्चों का हाल जानने पहुंचे तो वहां भी बेतुकी बात कहने से खुद को नहीं रोक पाएं। नीतीश कुमार के मंत्री मासूमों की मौत पर विवादित बयान दे रहे हैं।

आइये जानते हैं मासूमों की मौत का किसने बनाया मज़ाक (Leaders Controversial Statement On Chamki Fever )

चमकी से 100 से ज्यादा बच्चों की मौत पर विपक्ष का सन्नाटा

गर्मी से हो रही मौत

मुजफ्फरपुर के सांसद अजय निषाद से जब मासूमों की मौत के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “इस बार ज्यादा मामले आ रहे हैं, इसकी वजह गर्मी भी है। गर्मी बहुत ज्यादा हो रही है, उसका रोकथाम करने के लिए पेड़-पौधे लगाना चाहिए। बीमारी की असली वजह 4 जी है, जी फॉर गर्मी, गांव, गरीबी और गंदगी। इससे बीमारी का ताल्लुक है। ज्यादातर मरीज गरीब तबके से हैं और उनके रहन-सहन के स्तर में गिरावट है। उसे सुधारने की जरूरत है।”

अनुसूचित जाति के मरीज है

अजय निषाद ने आगे कहा, “ज्यादातर मरीज गरीब परिवार से हैं, अनुसूचित जाति से हैं। गंदगी के कारण भी यह बीमारी हो रही है। कभी-कभी चूक हो जाती है। बीमारी में गिरावट हो गई, इसलिए ध्यान हट गया।”

Chamki Bukhar : लक्षण, कारण, इलाज और बचाव?

देरी से पहुँच रहे अस्पताल

बिहार के मुख्‍य सचिव दीपक कुमार का बच्चों की मौत पर कहना है कि मुजफ्फरपुर में एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम (Acute encephalitis syndrome) से मौत के पीछे बच्‍चों का देरी से अस्‍पताल पहुंचना है। यह बार-बार कहा गया है कि अस्‍पतालों में आने वाले मरीजों को आने का खर्च नहीं देना होगा। उनका किराया वापस किया जाएगा। सभी को 400-400 रुपये किराया दिया जाएगा। सीएम नीतीश कुमार ने अपने दौरे के बाद बच्‍चों के बेहतर इलाज के लिए कई निर्देश दिए हैं।

बच्चों का इलाज जरूरी

बिहार सरकार के मंत्री श्याम रजक ने इस इस बिमारी के बारे में कहा कि बीमार बच्चों को देखने के लिए सीएम नीतीश कुमार के यहां आने से अधिक जरूरी मरीजों का इलाज है और वह जारी है। इस हालात पर सीएम की पूरी नजर बनी हुई है। आखिर महत्वपूर्ण क्या है, बच्चों का इलाज या फिर सीएम का यहां आना?

बारिश से बढ़ रही बीमारी

जेडीयू से सांसद दिनेश चंद्र यादव ने इस बीमारी के बारे में कहा कि मुजफ्फरपुर की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। कई सालों से जब भी गर्मियां आती हैं, बच्चे बीमार पड़ जाते हैं और मौत का आंकड़ा बढ़ जाता है। ऐसा हर बार होता है, सरकार ने व्यवस्था की है। जैसे ही बारिश शुरू होगी, यह रुक जाएगा।

मौत नहीं हत्या

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी नेता राबड़ी देवी ने नीतीश कुमार और पीएम मोदी पर तंज  कसकर मासूमों की मौत को हत्या करार दिया है। राबड़ी देवी ने ट्वीट कर कहा, “एनडीए सरकार की घोर लापरवाही, कुव्यवस्था, सीएम का महामारी को लेकर अनुत्तरदायी, असंवेदनशील और अमानवीय अप्रोच। लचर और भ्रष्ट व्यवस्था, स्वास्थ्य मंत्री के गैर-जिम्‍मेदाराना व्यवहार और भ्रष्ट आचरण के कारण गरीबों के 1000 से ज्‍यादा मासूम बच्चों की चमकी बुखार के बहाने हत्या की गई है।”

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