कांग्रेस के हाथ में महाराष्ट्र की सत्ता की चाबी!

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महाराष्ट्र (Maharashtra ) मे सत्ता के लिए छिड़ी महाभारत में नित नए बदलाव देखने को मिल रहा है। कभी पासा शिवसेना (Shiv Sena ) के पाले में चला जाता है तो कभी एनसीपी (NCP ) के पाले में, लेकिन अब सब कुछ कांग्रेस के पास चला गया है। राज्य में कांग्रेस किंग मेकर (Congress King Maker ) बनकर उनभर सकती है। महाराष्ट्र की सत्ता की चाबी अब कांग्रेस के पास पहुँच गई है। कांग्रेस (Congress ) चाहेगी तो शिवसेना के साथ सरकार बनाना संभव होगा, नहीं तो फिर किसी भी पार्टी के पास कोई अन्य विकल्प नहीं रह जाएगा।

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क्या कांग्रेस के साथ बनेगी शिवसेना की बात

शिवसेना के समर्थन को लेकर सोनिया गांधी (Sonia Gandhi ) की अध्यक्षता में कार्यसमिति कोई निर्णय नहीं ले पाई। अब कांग्रेस ने राज्य के वरिष्ठ नेताओं को चर्चा के लिए बुलाया गया है। एनसीपी और शिवसेना के लिए अकेले सरकार बनाना संभव नहीं है। शिवसेना के पास 56 सीटें तथा एनसीपी के पास 54 सीटें हैं, दोनों को मिलकर भी बहुमत का 145 का आंकड़ा नहीं बन पा रहा है। भाजपा से अलग जाकर यदि शिवसेना को सरकार बनानी है तो उसे इसके लिए कांग्रेस के साथ की आशयकता है, लेकिन दोनों पार्टियों की अलग-अलग विचारधार गठबंधन को फैसले में कठिनाई ला रही है। भाजपा ने रविवार को राज्यपाल से मुलाकात करके सरकार बनाने से मना कर दिया। जिसके बाद राज्यपाल ने दूसरा सबसे बड़ा दल होने के नाते शिवसेना को सरकार बनाने का न्योता दिया है, लेकिन अभी शिवसेना की ओर से सरकार बनाने का दावा नहीं पेश किया जा रहा है।

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एनडीए गठबंधन से अलग हुई शिवसेना

भाजपा-शिवसेना (BJP-Shivsena) के बीच 1989 में गठबंधन हुआ था। इसके बाद साल 1990 में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव दोनों दलों ने साथ में लड़ा था। इसके बाद 2014 विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दल अलग हो गए थे, चुनाव भी लग-अलग ही लड़ा गया, लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद दोनों दलों ने गठबंधन की सरकार बनाई थी। इस बार दोनों दल चुनाव परिणाम आने तक साथ में थे, लेकिन परिणामों के बाद सत्ता के लिए दोनों अलग हो  रहे हैं । इतना ही नहीं शिवसेना के एक मंत्रियो ने भी केन्द्रीयमंत्री  मण्डल से इस्तीफा दे दिया है। शिवसेना के मंत्री सावंत का कहना है कि शिवसेना (Shiv Sena) का पक्ष सच्चाई है। इतने झूठे माहौल में दिल्ली सरकार में क्यों रहे और इसीलिए मैं केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे रहा हूं। भाजपा शिवसेना के बीच सीटों का बंटवारा 50:50 प्रतिशत तय था। लेकिन नतीजे आने के बाद भाजपा ने कहा कि ऐसे किसी करार पर बात नहीं हुई। अब केंद्र में काम नहीं कर सकता हूं।

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     – Ranjita Pathare 

 

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