CM Yogi ने दी कमिश्नर प्रणाली को मंजूरी, लखनऊ और नोएडा में लागू

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उत्तर प्रदेश की सरकार (UP Government implemented Police Commissioner System)ने राज्य की पुलिस व्यवस्था को लेकर एक अहम फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ (Lucknow) और नोएडा (Noida) में सबसे पहले पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू कर दी गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) सहित कैबिनेट मिनिस्टर्स (Cabinet ministers) ने इस पर चर्चा की, बैठक में मुंबई (Mumbai) और गुरुग्राम (Gurugram) में लागू पुलिस कमिश्नर प्रणाली के मॉडल पर चर्चा की गई। इसके बाद इस प्रणाली को लागू करने पर मुहर लगा दी गई। सुजीत पांडेय लखनऊ के पहले पुलिस कमिश्नर होंगे वहीं गौतमबुद्ध नगर के पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह होंगे।

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क्या है पुलिस कमिश्नर प्रणाली

वास्तव में ये प्रणाली अंग्रेजों के ज़माने की है जो भारत की आज़ादी से पहले भी लागू (Police Commissioner System)थी। यह व्यवस्था मुंबई (Mumbai) , कोलकाता (Kolkata)और मद्रास (चेन्नई) में लागू थी, क्योंकि इन शहरों को प्रेसीडेंसी शहर कहा जाता था। देश के 15 राज्यों के 72 शहरों में कमिश्नरेट प्रणाली (Commissioned system) पहले से लागू है। लेकिन आज भी पूरे देश में पुलिस अधिनियम, 1861 पर आधारित प्रणाली ही लागू है। भारतीय पुलिस अधिनियम, 1861 के भाग 4 के तहत जिला अधिकारी (D.M.) के पास पुलिस पर नियत्रण करने के कुछ अधिकार होते हैं। लेकिन जिन राज्यों में कमिश्नर प्रणाली लागू (Commissioner system implemented) है उनमें, – दिल्ली पुलिस, दुर्गापुर पुलिस (Durgapur police), बैरकपुर पुलिस (Barrackpore Police), बिधाननगर पुलिस (Bidhannagar Police), चंद्रनगर पुलिस (Chandranagar Police) , हावड़ा पुलिस (Howrah Police), कोलकाता पुलिस (Kolkata Police), सिलीगुड़ी पुलिस (Siliguri Police), कटक पुलिस आयुक्तालय, मुंबई पुलिस, नागपुर पुलिस, पुणे पुलिस, विजयवाड़ा पुलिस, विशाखपट्नम सिटी पुलिस, बंगलौर सिटी पुलिस, कोच्चि सिटी पुलिस, कोल्लम सिटी पुलिस, त्रिशूर सिटी पुलिस, तिरुवनन्तपुरम सिटी पुलिस (Thiruvananthapuram City Police), कोयम्बटूर सिटी पुलिस, ग्रेटर चेन्नई पुलिस, हैदराबाद सिटी पुलिस, निजामाबाद पुलिस आदि शामिल हैं।

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इस प्रणाली के फायदे

कमिश्नर प्रणाली लागू (Police Commissioner System implemented) होते ही पुलिस के अधिकार बढ़ जाते है। कुछ अति आवश्यक स्थितियों से निपटने के लिए पुलिस को जिलाधिकारी (डीएम), एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट, मंडल कमिश्नर या फिर शासन के आदेश का इंतज़ार किए बिना ही एक्शन लेने का अधिकार होता है। पुलिस फैसले लेने के लिए ज्यादा ताकतवर हो जाती है। जिले में कानून से जुड़े सारे फैसले लेने का अधिकार पुलिस कमिश्नर के पास होता है। कमिश्नर प्रणाली लागू होने से, डीएम से कुछ बातों के लिए अनुमति नहीं लेनी पड़ेगी। इस प्रणाली की मदद से पुलिस को सीआरपीसी में 107-16, धारा 144, 109, 110 और 145 के तहत करवाई की जिम्मेदारी मिल जाएगी। होटल के लाइसेंस, बार के लाइसेंस, हथियार के लाइसेंस देने का अधिकार, धरना प्रदर्शन की अनुमति, दंगे के दौरान लाठी चार्ज, कितना बल प्रयोग हो यह भी पुलिस ही तय कर सकेगी। जमीन संबंधी विवादों के निस्तारण का अधिकार भी पुलिस को मिलेगा। इस प्रणाली के आधार पर पद इस तरह होते है- पुलिस आयुक्त या कमिश्नर – सीपी, संयुक्त आयुक्त या ज्वॉइंट कमिश्नर – जेसीपी, डिप्टी कमिश्नर – डीसीपी, सहायक आयुक्त – एसीपी, पुलिस इंस्पेक्टर – पीआई, सब-इंस्पेक्टर – एसआई, पुलिस दल।

अब चूंकि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (capital Lucknow) और नोएडा में ये व्यवस्था लागू  (Police Commissioner System) कर दी गई है तो इस प्रणाली को लागू किए जाने और पुलिस की व्यवस्था में बदलाव किए जाने को लेकर बसपा सुप्रीमों मायावती ने सवाल उठाये हैं। मायावती का कहना है कि पुलिस व्यवस्था बदलने से कुछ नहीं होगा। इस नई व्यवस्था, नए सिस्टम को लेकर मायावती ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर जमकर निशाना साधा है। मायावती (Mayawati) ने इस पर अपने ट्विटर हैंडल से एक किया और लिखा, “उत्तर प्रदेश में केवल कुछ जगह पुलिस व्यवस्था बदलने से कुछ नहीं होगा। बल्कि आपराधिक तत्वों पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सख्त कानूनी कार्रवाई करने से ही प्रदेश की कानून-व्यवस्था में सही सुधार आ सकता है। इस तरफ सरकार को ध्यान देना चाहिए।” हालांकि सिर्फ मायावती ने नहीं बल्कि रिटायर्ड अधिकारियों ने भी इस प्रणाली को बेअसर बताया है। इन अधिकारीयों ने कहा कि, ‘डीएम-एसएसपी का सिस्टम सबसे अच्छा है। ऐसे में नए सिस्टम का कोई मतलब नहीं है।’ उनका कहना है कि पुलिस कमिश्नर को यदि पूरे अधिकार दे दिए जाएं तभी यह सिस्टम कारगर साबित होगा।

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Tarun / Prabhat

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