Citizenship Amendment Bill 2019 : नागरिकता संशोधन बिल को मंजूरी  

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नागरिकता संशोधन बिल (Citizenship Amendment Bill 2019) को मोदी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। अब केबिनेट  बैठक से मंजूरी मिलने के बाद  इस बिल को संसद में पेश किया जा सकता है। बिल को पास करने के लिए असली परीक्षा गृहमंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) को संसद में देनी होगी। इस बिल को लेकर पहले ही काफी हंगामा हो गया है। मोदी केबिनेट (Modi cabinet) मे इसे मंजूरी मिलने के बाद अब कहा जा रहा है कि गृहमंत्री अमित शाह इस बिल को गुरुवार को संसद में पेश कर सकते हैं ।

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संसद में असली परीक्षा

बिल को पास करने के लिए असली परीक्षा गृहमंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah)  को संसद में देनी होगी।  बिल को लेकर विपक्ष के नेताओं का कहना है कि इसमें धर्म के आधार पर नागरिकता देने का प्रावधान है वहीं  सरकार का कहना है कि यह बिल देश से घुसपैठियों को बाहर निकालने के लिए लाया जा रहा है।  सबसे पहले असम में एनआरसी यानी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (National Register of Citizens) लागू किया गया, जिसे बाद अब इसे पूरे देश में लागू करने कि तैयारी कि जा रही है।

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क्या है नागरिकता संशोधन विधेयक?

नागरिकता संशोधन विधेयक ( National Register of Citizens) को लेकर पूरे देश में हंगामा मचा हुआ है। यह  नागरिकता कानून, 1955 (Citizenship Act, 1955)  में संशोधन का प्रस्ताव है। अब इसमें सरकार ने अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्मों के शरणार्थियों के लिए नागरिकता के नियमों  को आसान बनाया है। अभी  तक भारत कि नागरिकता के लिए  किसी व्यक्ति को यहाँ कम से कम  11 साल रहना जरूरी होता था, लेकिन अब इस नियम को आसान बनाया जा रहा है और  नागरिकता हासिल करने की अवधि को एक साल से लेकर 6 साल करने की कोशिश  की जा रही  है।

-Ranjita Pathare

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