जमीन, आसमान के बाद अब पानी के जरिये CAA का विरोध, बोट पर निकले प्रदर्शनकारी

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देशभर में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA Protest In Mangaluru) को लेकर भारी प्रदर्शन जारी है. अल्पसंख्यंक बाहुल्य क्षेत्रों (Minority dominated areas) की गली मोहल्लो सड़को में इसको लेकर भारी प्रदर्शन किया जा रहा है। दिल्ली के शाहीन बाग में पिछले एक महीने से CAA विरोधी (CAA protest) प्रदर्शन चल रहा है, जहां हजारों की संख्या में महिलाएं बैठी हुई हैं. इस प्रदर्शन के कारण दिल्ली से नोएडा जाने वाला रास्ता भी प्रभावित हुआ है. कल मकर सक्रांति (Makar Sakranti) के अवसर जमकर पतंगबाज़ी हुई जिसमे CAA विरोधी पतंग हवा में उड़ाकर लोगों ने इस कानून का जमकर विरोध किया इसके अलावा दूसरी ओर हाल ही में जब यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ (UP CM Yogi Adityanath) बिहार के गया में सभा कर रहे थे, तब भी काले गुब्बारे उड़ाकर उनका विरोध किया गया था.

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इस नागरिकता कानून का विरोध (CAA Protest In Mangaluru) इस चरम पर पहुंच चुका है की अब लोग जमीन, आसमान के बाद इसके विरोध के लिए पानी का भी सहारा ले रहे है जी हां बुधवार को कर्नाटक के मेंगलुरु में CAA के विरोध में रैली थी, यहां लोग हिस्सा लेने के लिए बोट से पहुंचे. सोशल मीडिया पर साझा किये गए एक वीडियो में दर्जनों बोट में सैकड़ों प्रदर्शनकारी मेंगलुरु के प्रदर्शनस्थल पर जा रहे हैं. हर बोट में करीब दर्जनभर लोग सवार हैं और हाथ में तिरंगा लेकर जा रहे हैं. आपको बता दें की मेंगलुरु में बुधवार को एक बड़ी रैली का आयोजन किया गया जहां अलग-अलग संगठन के समर्थक इकट्ठा हुए थे. इनमें अधिकतर मुस्लिम समुदाय के कुछ संगठन थे, जो कि लगातार CAA के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं.

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आपको बता दें की संसद से बिल पास होने के बाद नागरिकता संशोधन कानून (CAA Protest In Mangaluru) 10 जनवरी से अमल में आ गया है. अब इसके लागू होने के बाद पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली केरल सरकार ने नागरिकता कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. केरल सरकार का कहना है कि संशोधित कानून भारतीय संविधान द्वारा दिए गए समानता के अधिकार के प्रावधानों के खिलाफ है. केरल सरकार ने CAA के खिलाफ संविधान के आर्टिकल 131 के तहत सुप्रीम कोर्ट का रुख किया  है. कोर्ट में  CAA को चुनौती देते हुए इसे भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताया गया है. संविधान का आर्टिकल 131 भारत सरकार और किसी भी राज्य के बीच किसी भी विवाद में सर्वोच्च न्यायालय को मूल अधिकार क्षेत्र देता है.

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-Mradul tripathi

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