भूपेंद्रसिंह हुड्डा के खिलाफ चार्जशीट दायर

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हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्रसिंह हुड्डा के खिलाफ सीबीआई ने पंचकुला स्थित एक विशेष सीबीआई अदालत में चार्जशीट दायर की है। चार्जशीट में वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और एजेएल का नाम भी शामिल है। हाल ही में हरियाणा के राज्यपाल नारायण आर्य ने बहुचर्चित एजेएल मामले में सीबीआई को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्रसिंह हुड्डा के खिलाफ अभियोग चलाने की मंजूरी दी थी।

भूपेंद्रसिंह हुड्डा पर आरोप है कि उन्होंने मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए नेशनल हेराल्ड की सब्सिडी एसोसिएट्स जनरल लिमिटेड (एजेएल) कंपनी को 2005 में वर्ष 1982 की दरों पर प्लॉट अलॉट करवाया था। मोतीलाल वोरा मेसर्स एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड के उस वक्त अध्यक्ष थे।

क्य है पूरा मामला ?

24 अगस्त 1982 को पंचकुला सेक्टर-6 में 3360 वर्गमीटर का प्लॉट नंबर सी-17 तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल ने अलॉट कराया। कंपनी को इस पर 6 माह में निर्माण शुरू करके दो साल में काम पूरा करना था,  परंतु  कंपनी 10 वर्ष में भी ऐसा नहीं कर पाई। 30 अक्टूबर 1992 को हुड्डा ने अलॉटमेंट कैंसल करके प्लॉट को रिज्यूम कर लिया।

26 जुलाई 1995 को मुख्य प्रशासक हुड्डा ने एस्टेट ऑफिसर के आदेश के खिलाफ कंपनी की अपील खारिज कर दी। 14 मार्च 1998 को कंपनी की ओर से आबिद हुसैन ने चेयरमैन हुड्डा को प्लॉट के अलॉटमेंट बहाली के लिए अपील की। 14 मई 2005 को चेयरमैन हुड्डा ने अफसरों को एजेएल कंपनी के प्लॉट अलॉटमेंट की बहाली की संभावनाएं तलाशने को कहा परंतु  कानून विभाग ने अलॉटमेंट बहाली के लिए साफतौर पर इनकार कर दिया।

18 अगस्त 1995 को फ्रेश अलॉटमेंट के लिए आवेदन मांगे गए। इसमें एजेएल कंपनी को भी आवेदन करने की छूट दी गई। 28 अगस्त 2005 को हुड्डा ने एजेएल को ही 1982 की मूल दर पर प्लॉट अलॉट करने की फाइल पर साइन कर लिए। इसके साथ ही कंपनी को 6 माह में निर्माण शुरू करके एक वर्ष में काम पूरा करने को भी कहा गया।  सीए हुडा ने भी पुरानी रेट पर प्लॉट अलॉट करने के आदेश दे दिए। इस मामले में सतर्कता विभाग ने मई 2016 में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर केस दर्ज किया गया है। यह मामला हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की शिकायत पर दर्ज हुआ है।

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