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अमेजन,फ्लिपकार्ट के खिलाफ 700 से अधिक शहरों में भारी विरोध प्रदर्शन

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आज भारत के 700 से अधिक शहरों में व्यापारियों ने अमेजन और फ्लिपकार्ट(Amazon and Flipkart) जैसी ई-वाणिज्य कंपनियों (E-commerce companies) के अनैतिक एवं अनुचित कारोबारी तौर तरीकों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और सरकारी की एफडीआई नीति (FDI Policy) का खुले रूप से उल्लंघन करने के मुद्दे पर आज देश भर में कन्फेडरेशन ऑफ इंडिया ट्रेडर्स (Confederation of India Traders) के आह्वान पर व्यापारियों ने राष्ट्रीय विरोध दिवस (National protest day) मनाया और 700 से अधिक शहरों में व्यापारी संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए. इस धरने-प्रदर्शन में लाखों व्यापारी शामिल हुए और सरकार से इन दोनों कंपनियों के खिलाफ तुरंत कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग. अनेक स्थानों पर विरोध प्रदर्शन में अमेजन और फ्लिपकार्ट के पुतले जलाए गए. अमेजन-फ्लिपकार्ट गो बैक के नारों के साथ व्यापारियों ने अपना गुस्सा जाहिर किया. धरनों में ट्रांसपोर्ट, लघु उद्योग, किसान, हॉकर्स, उपभोक्ता आदि अन्य वर्गों के लोग भी शामिल हुए.

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कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि देश के व्यापारियों को अमेजन और फ्लिपकार्ट के भारत में व्यापार करने पर कोई ऐतराज नहीं है, लेकिन व्यापारियों की तरह अमेजन और फ्लिपकार्ट को सरकार की एफडीआई पॉलिसी व अन्य कानूनों का पालन करना होगा जिससे बाजार में समान प्रतिस्पर्धा बनी रहे. उन्होंने कहा कि अमेजन और फ्लिपकार्ट द्वारा केंद्रीय वाणिज्य मंत्री (Union Commerce Minister) की सख्त चेतावनी के बावजूद लगातार अपने ई-कॉमर्स पोर्टल पर लागत से भी कम मूल्य पर माल बेचा जा रहा है और विभिन्न वस्तुओं पर भारी डिस्काउंट देते हुए कीमतों को सीधा प्रभावित किया जा रहा है जो एफडीआई नीति में स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित है. इससे देश भर का घरेलू व्यापारी बुरी तरह तबाह हो गया है और देश भर के व्यापारियों में बेहद रोष और आक्रोश है जिससे व्यापारियों को मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ रहा है.

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कैट ने सरकार से मांग की है की अमेजन और फ्लिपकार्ट के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करते हुए इनके पोर्टल तब तक बंद करने के आदेश तुरंत दिए जाए. जब तक ये कंपनियां अपने पोर्टल को पूरी तरह से एफडीआई की नीति के सभी प्रावधानों व अन्य कानूनों के अनुसार नहीं बना लेती. देश भर के व्यापारियों का स्पष्ट मत है कि अगर इन कंपनियों को अपने वर्तमान कारोबारी स्वरूप को जारी रखने की अनुमति दी जाती है तो वे दिन दूर नहीं जब ये कंपनियां ईस्ट इंडिया कंपनी के दूसरे संस्करण के रूप में उभरेंगी जो न केवल खुदरा व्यापार के लिए हानिकारक होगा बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी खतरनाक साबित होगी.

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-Mradul tripathi

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