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मनमोहन शायर, चिदम्बरम कवि और सिन्हा हुए थे फ़िल्मी

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बजट देश का सबसे महत्वपूर्ण अवसर होता है | इस अवसर पर हर वर्ग को उम्मीद होती है कि उनके लिए कुछ बेहतर निकलकर आएगा | बजट कई विशेषताओं जैसे हलवा पार्टी, विशेष सूटकेस आदि को समेटे होता है| ऐसी ही एक विशेषता भाषण के दौरान वित्तमंत्रियों का संसद में अनोखा अंदाज़ भी होता है| संसद में बजट पेश करने में काफी समय लगता है| इस दौरान कई वित्तमंत्री माहौल को हल्का-फुल्का करने के लिए अनोखे अंदाज़ में नज़र आते है| पूर्व के कई वित्तमंत्री इस अनोखे अंदाज़ (Former Finance Minister Facts) के कारण लोकप्रिय हो चुके हैं| आइये आपको बताते हैं उनके अनोखे अंदाज़ के बारे में|

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Former Finance Minister Facts :

शायर मनमोहन सिंह

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मनमोहनसिंह 1991 में वित्त मंत्री थे | उनको आर्थिक उदारीकरण (Economic liberalization) का जनक भी कहा जाता है | 1991 में अपने बजट भाषण में उन्होंने मशहूर शायर इकबाल की कुछ पंक्तियां सुनाई थीं| उन्होंने कहा था|

‘यूनान-ओ-मिस्र-रोम सब मिट गए जहां से, अब तक मगर है बाकी, नाम-ओ-निशां हमारा’

मजाकिया राजीव गांधी

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राजीव गांधी 1987 में देश के प्रधानमंत्री होने के साथ-साथ वित्तमंत्री भी थे| 1987-88 का बजट पेश करते हुए सिगरेट पर ज्यादा टैक्स लगाया था| तब उन्होंने मजाकिया अंदाज़ में कहा था|

Budget 2019 : बजट से जुड़ी हलवा और सूटकेस जैसी खास बातें

“मुझे ज्यादा राजस्व जुटाना है, जिसके लिए मुझे वित्तमंत्री के भरोसमंद दोस्तों और स्वास्थ्य मंत्री के दुश्मनों का सहारा लेना होगा”

कवि पी चिदम्बरम

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पी चिदम्बरम ने 1997 में बजट पेश करते समय तमिल कवि तिरुवल्लुवर की पंक्तियां पढ़ी थीं-

“इदिप्परई इल्लाथा इमारा मन्नान केदुप्पार इलानुअम केदुम”

(उस राजा पर नज़र रखें जो ऐसे लोगों पर भरोसा नहीं करता, जो उससे खरी बात कहते हैं, उसका कोई दुश्मन न हो तो भी वह बर्बाद हो सकता है)

फिल्मप्रेमी यशवंत सिन्हा

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वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने 2002 में अटलबिहारी वाजपेयी सरकार का बजट पेश किया था| उस समय उन्होंने संसद में एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की तारीफ करते हुए कहा था|

Interim Budget 2019 Live Updates :  कर सीमा में बड़ी छूट

“पिछले तीन साल में हर साल फिल्मों का निर्यात करीब दोगुना बढ़ा| अब समय आ गया है कि हम ऐसी वित्तीय व्यवस्था करें, जिसमें हम मनोरंजन उद्योग के लिए ज्यादा ‘खुशी’ दे सकें और उनका ‘ग़म’ दूर कर सकें|”

रचनाकार अरुण जेटली

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2017 में बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नोटबंदी से न घबराने का आह्वान करते हुए दो पंक्तियां पढ़ी थीं| खुद के द्वारा लिखी गई इन पंक्तियों में उन्होंने कहा था|

“इस मोड़ पर घबरा के न थम जाएं आप, जो बात नई है उसे अपनाएं आप, डरते हैं नई राह पे ये क्यूं चलने से, हम आगे-आगे चलते हैं, आ जाएं आप|”

-अंकुर उपाध्याय

Indian Budget History : पहले बजट से आज तक के बदलाव का सफर

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