बुद्ध पूर्णिमा : जानें कैसे ‘सिद्धार्थ’ से भगवान बने

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बुद्ध पूर्णिमा न केवल बौद्ध धर्म के अनुयायियों का खास पर्व है बल्कि हिन्दू धर्म में भी इस दिन का उतना ही महत्व है जितना कि बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए। इस दिन 563 ई.पू. में बुद्ध का जन्म लुंबिनी, जो अब नेपाल है, में हुआ था। पूर्णिमा के दिन ही भगवान गौतम बुद्ध का महापरिनिर्वाण समारोह भी मनाया जाता है। भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण ये तीनों वैशाख पूर्णिमा के दिन ही हुए थे। ऐसा किसी अन्य महापुरुष के साथ आज तक नहीं हुआ है। अपने मानवतावदी एवं बौद्ध धर्म दर्शन के कारण भगवान बुद्ध दुनिया के सबसे महापुरुषों में से एक माने जाते हैं।

भगवान बुद्ध का जन्म इक्ष्वाकु देशीय क्षत्रिय शाक्य कुल के राजा शुद्धोधन के घर हुआ था। उनकी मां का नाम महामाया था, जो कोलीय वंश से थीं। सिद्धार्थ विवाहोपरांत रात में राजपाट छोड़कर नवजात शिशु राहुल और पत्नी यशोधरा को त्यागकर सत्य और दिव्यज्ञान की खोज में जंगल चले गए। वर्षों की कठोर साधना के पश्चात बोधगया (बिहार) में बोधिवृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और वे सिद्धार्थ से गौतम बुद्ध बन गए।

पढ़े भगवान बुद्ध के अनमोल वचन

हम जो कुछ भी हैं, वह हमने आज तक क्या सोचा इस बात का परिणाम है। यदि कोई व्यक्ति बुरी सोच के साथ बोलता या काम करता है तो उसे कष्ट ही मिलता है। यदि कोई व्यक्ति शुद्ध विचारों के साथ बोलता या काम करता है तो उसकी परछाई की तरह खुशी उसका साथ कभी नहीं छोड़ती है|

– हजारों खोखले शब्दों से अच्छा वह एक शब्द है, जो शांति लाए।

– अतीत पर ध्यान मत दो, भविष्य के बारे में मत सोचो, अपने मन को वर्तमान क्षण पर केन्द्रित करो।

– स्वास्थ्य सबसे बड़ा उपहार है, संतोष सबसे बड़ा धन है, वफादारी सबसे बड़ा संबंध है।

– जैसे मोमबत्ती बिना आग के नहीं जल सकती, मनुष्य भी आध्यात्मिक जीवन के बिना नहीं जी सकता।

– तीन चीजें ज्यादा देर तक नहीं छिप सकती, सूर्य, चंद्रमा और सत्य।

– अपने मोक्ष के लिए खुद ही प्रयत्न करें, दूसरों पर निर्भर न रहें।

– किसी विवाद में हम जैसे ही क्रोधित होते हैं, हम सच का मार्ग छोड़ देते हैं और अपने लिए प्रयास करने लगते हैं।

– घृणा घृणा से नहीं प्रेम से खत्म होती है, यह शाश्वत सत्य है।

– वह जो पचास लोगों से प्रेम करता है, उसके पचास संकट हैं| वह जो किसी से प्रेम नहीं करता, उसको एक भी संकट नहीं है।

– क्रोध को पाले रखना गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से पकड़े रहने के समान है, इसमें आप ही जलते हैं।

– मैं कभी नहीं देखता कि क्या किया जा चुका है| मैं हमेशा देखता हूं कि क्या किया जाना बाकी है।

– बिना सेहत के जीवन जीवन नहीं है, बस पीड़ा की एक स्थिति है, मौत की छवि है।

– सत्य के मार्ग पर चलते हुए कोई दो ही गलतियां कर सकता है, पूरा रास्ता न तय करना और इसकी शुरुआत ही न करना।

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