तकरार ख़त्म करने में जुटी भाजपा

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भारतीय जनता पार्टी और एनडीए गठबंधन के अन्य साथियों के बीच मनमुटाव की ख़बरें आती रहती हैं| 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए को एकजुट रखना भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती है| हालांकि भाजपा  अध्यक्ष अमित शाह की सहयोगी पार्टी शिवसेना और शिरोमणी अकाली दल के प्रमुखों से मुलाकात के बाद एनडीए के अंदर उठ रहे विवादों पर फिलहाल विराम लग गया है|  गठबंधन ने भाजपा के साथ एक संयुक्त समिति बनाने का फैसला किया है, ताकि बचे हुए मुद्दों को भी सुलझाया जा सके| इसे 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले सीटों के बंटवारे के मुद्दों को सुलझाना भी शामिल है|

हाल ही में उपचुनावों में भाजपा की हार ने  एनडीए के सहयोगियों, खासतौर पर शिवसेना, अकाली दल, जेडीयू, एलजेपी और आरएलएसपी को पार्टी पर सवाल उठाने के मौका दे दिया है| भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और शिरोमणी अकाली दल के प्रमुख प्रकाशसिंह बादल और सुखबीरसिंह बादल के बीच चंडीगढ़ में हुई मुलाकात के बाद दोनों पक्षों ने सकारात्मक चर्चा की बात कही|  सूत्रों का कहना है कि संयुक्त समिति में भाजपा और शिरोमणी अकाली दल के 3 सदस्य होंगे, जो सभी मुद्दों के साथ सीटों के बंटवारे पर भी चर्चा करेंगे। सुखबीरसिंह बादल इस कमिटी के प्रमुख होंगे|

वहीं इसी तरह की एक कमिटी महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ पहले से बनाई गई है, जहां शिवसेना प्रमुख भाजपा से सहमत होते नजर नहीं आ रहे हैं| बताया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव को लेकर दोनों पार्टियों के बीच 50:50 के फ़ॉर्मूले पर बात चल रही है| शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के निधन के बाद राज्य में भाजपा प्रमुखता के साथ उभरी है, जबकि शिवसेना को कई मौकों पर नुकसान उठाना पड़ा है| हाल ही में पालघर उपचुनाव के नतीजे इस बात के ताजा उदाहरण हैं|

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