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किसानों की आत्महत्या के लिए भाजपा जिम्मेदार!

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महाराष्ट्र (Maharashtra, Government Formation) में सत्ता की लड़ाई के बीच अब एक नया मुद्दा सामने आ रहा है।  भाजपा को किसानों की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार (BJP responsible for farmers suicide ) ठहराया जा रहा है। एक बार फिर शिवसेना ने अपने आक्रमक अंदाज में बीजेपी पर निशाना साधते हुए सामना में आर्टिकल लिखा है। सामना में लिखा है कि केंद्र सरकार पर महाराष्ट्र के किसान जिस आशा भरी नजर से देख रहे है, उस पर सरकार खरी नहीं उतर रही है। सरकार किसानों की हाय ना ले बल्कि उनकी मदद कर उनकी जान बचाये।

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महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या का दौर शुरू

सामना में शिवसेना ने आगे लिखा कि पहले अकाल, फिर अतिवृष्टि के संकट ने महाराष्ट्र के किसानों का जीना मुहाल कर दिया। विशेषकर मराठवाड़ा से किसानों की आत्महत्यावाली खबरें मन को खिन्न करनेवाली हैं। मराठवाड़ा के हर जिले में आत्महत्याओं का दौर शुरू हो गया है। 14 अक्टूबर से 11 नवंबर के बीच मराठवाड़ा के 68 किसानों ने अपनी इहलीला समाप्त कर ली। बीड जिले में महीने भर में 16 किसानों ने आत्महत्या की, नांदेड जिले में 12, परभणी जिले में 11, संभाजीनगर जिले में 9, लातूर में 7, जालना में 6, हिंगोली जिले में 4 और धाराशिव जिले में 3 किसानों ने आत्महत्या की है। विदर्भ की भी परिस्थिति इससे अलग नहीं है।

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सामना में आगे लिखा है कि किसान आधुनिक प्रक्रिया का उपयोग करें, फसलों का नियोजन करें और उत्पादन दोगुना करें, जैसी बातें भाषण में ठीक हैं, लेकिन खेत में जो किसान मेहनत करता है उससे मिलने के बाद कागज के ये सुनहरे सपने नष्ट हो जाते हैं। किसानों को दोगुने उत्पादन की आवश्यकता होती है, लेकिन प्रकृति उसे दे तब न! कभी अकाल, कभी ओलावृष्टि और कभी अतिवृष्टि जैसे प्राकृतिक संकट किसानों पर आते रहते हैं। परिस्थिति का सामना न करते हुए किसान मौत को गले क्यों लगाते हैं, ऐसा सवाल जिनके मन में उठता है उन्हें किसानों की वित्तीय व्यवस्था और किसानों की परिस्थितियों को ठीक से समझ लेना चाहिए। गत एक महीने में ही मराठवाड़ा के 68 किसानों ने आत्महत्या की है विदर्भ के किसानों की आत्महत्या वाले आंकड़े भी चिंताजनक हैं. निराश किसान केंद्र सरकार की ओर बड़ी आशा के साथ देख रहा है। हमारा सरकार से इतना ही कहना है कि आत्महत्या कर रहे किसानों की हाय मत लो और जल्द-से-जल्द उन्हें सहायता देकर उनकी जान बचाओ।

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     – Ranjita Pathare 

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