महाराष्ट्र की राजनीति में पवार की कूटनीति से कैसे हारी मोदी-शाह की जोड़ी ?

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महाराष्ट्र की स्थिति अब हम सबसे सामने है। शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस की सरकार (Shiv Sena-NCP Congress government in Maharashtra ) लगभग बनने ही वाली है। तीनों दलों के नेता अब मंत्री पद को लेकर बैठक कर रहे हैं। आज महाराष्ट्र की राजनीति में भले हो शांति आ गई हो, लेकिन इससे बीजेपी को बड़ा झटका लगा। अब सवाल यह उठ रहा है कि बीजेपी के चाणक्य कहलाए जाने वाले अमित शाह (BJP Chanakya Amit Shah), जिन्होने सूखे ग्रस्त इलाके से भी बीजेपी की नाव को तैराकर बाहर निकाल दिया, वे महाराष्ट्र में कैसे मात खा गए ?

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गोवा और हरियाणा जैसे राज्यों में बहुमत से दूर रहने के बाद भी बीजेपी ने आसनी से सरकार बना ली थी, लेकिन महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा वोट हासिल करने के बाद भी भाजपा की सरकार नहीं टिक पाई। सीएम पद के बँटवारे की शिवसेना की मांग को बीजेपी ने सिरे से खारिज कर दिया था, जिसके बाद शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी का दामन थाम लिया और सूबे में नई सरकार बना ली। विपरीत विचारधाराओं वाली पार्टियों के एक साथ आने को किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है। पहले जहां बीजेपी के अमित शाह को चाणक्य कहा जाता था, वहीं अब यह जगह  शरद पवार को दी जा रही है। ऐसा शायद पहला मौका होगा जब ज्यादा सीट मिलने के बाद भी बीजेपी अपनी सरकार बनाने में नाकाम रही हो।

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महाराष्ट्रा की राजनीति में एनसीपी के शरद पवार के इस खेल के बारे में राजनीति के एक जानकार का कहना है कि जब भी कोई पार्टी सरकार बनाने का दावा पेश करती है तो उनके पास नंबर्स होते हैं। इस खेल के पटाक्षेप से साफ़ हुआ कि अजित पवार के साथ दस-बारह विधायक ही थे और बाद में वे भी नहीं रहे। शरद पवार ने अपने 54 में से 53 विधायकों को अपने पक्ष में दर्शा दिया।  सिर्फ अजित पवार बचे थे तो उन्होंने मंगलवार को उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया। शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस अपने विधायकों को साथ रखने में कामयाब हुए। इस खेल में ज़्यादा नुकसान बीजेपी और देवेंद्र फडणवीस का हुआ क्योंकि अजित पवार तो सेफ़ गेम खेल रहे थे। जब उन्हें लगा कि बीजेपी कि कश्ती डूबने वाली है तो वे फौरन एनसीपी की नाव पर सवार हो गए और बच गए।

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            – Ranjita Pathare 

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