चंदे के मामले में भी भाजपा ने मारी बाजी

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देश में सबसे आगे चलने वाली और अधिकतर राज्यों में सरकार बना चुकी भाजपा और भी कई मामलों में अपने प्रतिद्वंदियों से आगे है| भाजपा अब देश की सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद आर्थिक मामले में भी सबसे आगे है|

चुनाव सुधार की दिशा में काम करने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने सभी सात राष्ट्रीय दलों की आय और खर्च का विवरण जारी किया है। इस रिपोर्ट को पढ़ने के बाद एक बात तो स्पष्ट हो गया है कि भाजपा ने कमाई के मामले में बाकी सभी पार्टियों को मीलों पीछे छोड़ दिया है।

एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, देश की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा की आय 2015-16 से 2016-17 के बीच 81.18 फीसद बढ़कर 1,034 करोड़ रुपए हो गई। इसमें से पार्टी ने 70 फीसद राशि खर्च की। देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस की आय में 14 फीसद गिरावट दर्ज की गई है। वहीं मायावती की बसपा की बात करें तो इस पार्टी ने अपनी 173 करोड़ रुपए की आय में से सिर्फ 30 फीसद खर्च किया। सभी राजनीतिक दलों की कुल कमाई में से भाजपा की हिस्सेदारी 66 फीसद रही।

99 दिन बाद भेजी रिपोर्ट

इस बार सालाना ऑडिट अकाउंट जमा कराने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2017 थी। 7 में से चार राष्ट्रीय स्तर की पार्टियां (भाजपा, कांग्रेस, एनसीपी और सीपीआई) पिछले पांच साल से लगातार ऑडिट रिपोर्ट भेजने में देरी कर रही हैं। इस बार भी सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने अपनी यह रिपोर्ट 8 फरवरी 2018 यानी 99 दिन की देरी से चुनाव आयोग में जमा की। जबकि कांग्रेस ने 19 मार्च यानी 138 दिन देरी से रिपोर्ट जमा करवाई। एनसीपी ने 2 महीने 19 दिन बाद 19 जनवरी 2018 को ऑडिट रिपोर्ट जमा की, जबकि सीपीआई ने 22 दिन देरी से 23 नवंबर 2017 को ऑडिट रिपोर्ट चुनाव आयोग में जमी करवाई।

इनसे कमाती हैं पार्टियां

साल 2016-17 में सभी राष्ट्रीय दलों (भाजपा, कांग्रेस, बसपा, एनसीपी, सीपीएम, सीपीआई और एआईटीसी) ने अपनी जो आय घोषित की, वह कुल मिलाकर 1559.17 करोड़ रुपए थी। इन सातों पार्टियों ने 1228.26 करोड़ रुपए का खर्च भी दिखाया। साल 2015-16 से 2016-17 के बीच सात दलों की कुल आय में 525.99 करोड़ (51 फीसद) की बढ़ोतरी हुई। खास बात यह है कि पार्टियों की कमाई में 74.98 फीसद (1169.07 करोड़ रूपए) हिस्सेदारी स्वैच्छिक अनुदान की है। इसी दौरान सभी पार्टियों को कुल 128.60 करोड़ रूपए की कमाई बैंकों और फिक्स डिपॉजिट के ब्याज के रूप में हुई।

कांग्रेस ने कमाया ब्याज

2016-17 में सत्तारूढ़ भाजपा की कुल आय में स्वैच्छिक अनुदान की हिस्सेदारी 997.12 करोड़ यानी 96.41 फीसद रही। 31.18 करोड़ तो भाजपा को ब्याज के रूप में ही कमाई हुई है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने 115.644 करोड़ (51.32 फीसद) की कमाई रेवेन्यू और कूपन जारी करके की। ग्रांट, डोनेशन और स्वैच्छिक अनुदान के जरिए कांग्रेस को 50.626 करोड़ (22.46 फीसद) की कमाई हुई। बैंकों में फिक्स डिपॉजिट पर मिले ब्याज के जरिए भी कांग्रेस ने 43.89 करोड़ की कमाई की।

भाजपा का 85 फीसद खर्च प्रचार पर

जहां तक खर्चे की बात करें तो तो भाजपा ने साल 2016-17 में 606.64 करोड़ रूपए (85.44 फीसद) चुनाव और आम प्रचार पर खर्च किए। 69.78 एडमिनिस्ट्रेशन कॉस्ट और 20.41 करोड़ रूपए सैलरी के रूप में भाजपा ने खर्च किए। दूसरी तरफ कांग्रेस की बात करें तो देश की सबसे पुरानी पार्टी ने 149.65 करोड़ रूपए (46.52 फीसद) चुनाव पर खर्च किए। 115.65 करोड़ रूपए (35.96 फीसद) कांग्रेस ने एडमिनिस्ट्रेशन और अन्य के रूप में खर्च किए।

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