भाजपा ने किया कांग्रेस का घेराव

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देश के लिए काला अध्याय माने जाने वाले इमरजेंसी के 43 साल पूरे होने पर केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि उनका मानना है कि इंदिरा गांधी का आपातकाल का फैसला सुनियोजित था। इसकी तैयारी इसे लागू करने के छह महीने पहले से चल रही थी।

केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली 24 जून से ‘इमरजेंसी रिविजिटेड’ नाम का ब्लॉग लिख रहे हैं। इसमें उन्होंने लिखा है कि आपातकाल लगने के 6 महीने पूर्व ही इसकी योजना तैयार कर ली गई थी।

अरुण जेटली ने इसके साथ ही लिखा कि लगभग उसी दौर में जनवरी, 1975 में ‘मदरलैंड’ अखबार के संपादक केआर मलकानी ने पहले पेज पर एक ज्योतिषीय भविष्यवाणी प्रकाशित की थी। इस आर्टिकल में जनसंघ सांसद और भविष्यवेत्ता वसंत कुमार पंडित ने इमरजेंसी लगाए जाने का अनुमान व्यक्त किया था। उसी में यह भी संभावना व्यक्त की गई थी कि पूरे विपक्ष को इमरजेंसी लगाए जाने के बाद जेल में बंद कर दिया जाएगा। मीडिया पर सेंसरशिप लगाई जाएगी और भारत तानाशाही राज्य की तरफ बढ़ जाएगा।

उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तुलना जर्मनी के क्रूर तानाशाह एडोल्फ हिटलर से की । जेटली ने लिखा कि दोनों ने ही संविधान की धज्जियां उड़ाईं। उन्होंने आम लोगों के लिए बने संविधान को तानाशाही के संविधान में बदल दिया। हिटलर ने संसद के ज्यादातर विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार करवा लिया था और अपनी अल्पमत की सरकार को संसद में दो तिहाई बहुमत के रूप में साबित किया।

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इमरजेंसी को लेकर कांग्रेस को घेरते नज़र आए। उन्होंने ट्वीट किया कि पूरा देश इमरजेंसी को एक ‘काले दौर’ के रूप में याद करता है। उस काले दौर में डर का माहौल पैदा किया गया था। उस वक्त राजनीतिक शक्ति के लिए सिर्फ जनता ही नहीं बल्कि विचार और कलात्मक आज़ादी को भी बंधक बनाया गया।’ उन्होंने यह भी लिखा कि मैं सभी पुरुषों और महिलाओं के जज्बे को सलाम करता हूं, जिन्होंने आपातकाल का पुरजोर विरोध किया। पीएम मोदी ने कहा कि 43 साल पहले लागू किए गए आदेश को भारत ‘अंधकार युग’ के तौर पर याद रखेगा, जहां सभी संस्थानों को दबाया गया।

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