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यहाँ बलि के बाद ज़िंदा हो जाते हैं जानवर

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क्या कभी आपने ये सुना हैं कि बलि के बाद जानवर ज़िंदा हो गया हो ? ऐसा तो शायद कहानियों में ही सुना होगा या देखा होगा, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि हमारे भारत में ही एक ऐसी जगह है जहाँ पर बलि के बाद जानवरों के प्राण वापस आ जाते हैं। यह बिहार में होता है। बिहार की भूमिका हर समय अहम रही है। इसी बिहार के कैमूर जिला में स्थित है मां मुंडेश्वरी का धाम और यही से अब ये बात भी सामने आ रही है कि वहां बलि के बाद जानवर ज़िंदा हो जाते हैं।

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कैमूर जिले ( Kaimur District in Bihar) के भगवानपुर (Bhagwanpur)  में पवरा पहाड़ी पर मां मुंडेश्वरी का मंदिर (Mundeshwari Temple) है। जहाँ पर बलि के बाद जानवर फिर जिंदा हो जाते हैं। मंदिर में लगे भारतीय पुरातत्व  सर्वेक्षण के बोर्ड के मुताबिक यह मंदिर 635 ई. पूर्व से अस्तित्व में है। मां का यह मंदिर कैमूर पर्वतश्रेणी की पवरा पहाड़ी पर 608 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। मंदिर तक पहुँचने के लिए 500 सीढ़िया चढ़नी पड़ती है, लेकिन फिर भी आस्था के प्रतीक इस मंदिर में भक्तों का तांता लगा होता है। मां मुंडेश्वरी धाम का ये मंदिर हालांकि इस मामले में सबसे जुदा है। इसका संरचना अष्टाकार है। यही हिस्सा मंदिर का गर्भगृह माना जाता है।

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काल्पनिक बलि

इस मंदिर के बारे में माता के चरणों में जैसे ही किसी जानवर को रखते हैं वैसे ही वह मूर्छित हो जाता है। फिर मंदिर के पुजारी कुछ मंत्र पढ़कर जानवर पर कोई चावल और माता के चरणों से उठाया हुआ फूल छिड़कते हैं। मान्यता के अनुसार माता मुंडेश्वरी यहां रक्तविहीन बलि लेती हैं। बकरा आंखे बंद कर एकदम शांत हो जाता है। ऐसा लगता है कि जैसे उसके प्राण हर लिये गये हैं। कुछ देर बाद पुजारी एक बार फिर उस पर फूल डालते हैं और जानवर फिर से उछलकर अपने पैरों पर खड़ा हो जाता है। इसे काल्पनिक बलि माना जाता है और कहते हैं कि माता इसी से खुश होती है।

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