website counter widget

बिहार की जनता डूब रही थी, नेता-मंत्री फिल्म देख रहे थे

0

देश के कई राज्यों में हाहाकार मचा हुआ है। कहीं बारिश के पानी से बाढ़ के कारण हाहाकार, तो कहीं सरकार बचाने को लेकर हाहाकार। देश में चाहे कुछ भी हो जाए, लेकिन एक बात तो तय है कि नेताओं की मौज-मस्ती कभी कम नहीं होती है। बिहार (BIHAR ) और असम (Assam) के हालत किसी से छिपे नहीं है। बाढ़ (Bihar Minister Watch Super 30 Movie Due TO Bihar Flood) के कारण लाखों लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। हजारों लोग बेघर हो गए हैं।

सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है, इतना सब कुछ होते हुए भीं बिहार के  नेता मौज-मस्ती कर रहे हैं। फिल्म देखने जा रहे हैं। फिल्म देखना गलत नहीं है, लेकिन हाहाकार के बीच में जो नेता फिल्म देखने पहुंचे क्या वे बाढ़ पीड़ितों से भी मिलने पहुंचे थे ?

मायावती के भाई की 400 करोड़ की बेनामी संपत्ति जब्त

फिल्म टैक्स फ्री

बिहार सरकार द्वारा फिल्म सुपर-30 (Super 30)  को टैक्स फ्री कर दी गई है। ये सरकार का सरहानीय कदम है कि ऐसे व्यक्ति के ऊपर बनी फिल्म को टैक्स फ्री किया गया, जिसने समाज के लिए बहुत बड़ा कार्य किया, लेकिन जैसे हालात इस समय है उन हालातों को देखते हुए सरकार ने बाढ़ पीड़ितों के लिए अच्छी व्यवस्था के इंतजाम के लिए खर्च करना चाहिए था।

Video : आकाश विजयवर्गीय की माफ़ी, बीजेपी की नौटंकी!

बिहार (Bihar Minister Watch Super 30 Movie Due TO Bihar Flood) की प्रमुख विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल ने  सुशील मोदी के सुपर-30 देखे जाने के मामले पर सवालिया निशान लगाते हुए सरकार की आलोचना की। आरजेडी के ट्विटर हैंडल पर पार्टी ने लिखा, “निशब्द! और बिहार का पूरा मंत्रिमंडल बुधवार रात सुशील मोदी की अगुआई में मल्टीप्लेक्स में फ्री डिनर के साथ फिल्म देख रहा था। ऊपर से मंत्री कह रहे थे- बाढ़ आई तो क्या खाना-पीना, मूवी देखना छोड़ दे। बेशर्म कहीं के!”

Ayodhya Land Dispute Case : सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

बारिश और बाढ़ (Bihar Minister Watch Super 30 Movie Due TO Bihar Flood) के चलते बिहार के 12 जिलों में खतरनाक हालात बने हुए हैं। राज्य में बाढ़ से 24 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। इन जिलों में शिवहर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, मधुबनी, अररिया, किशनगंज, सुपौल, दरभंगा, पूर्णिया, मुजफ्फरपुर सहरसा और कटिहार शामिल है। पूरे प्रदेश में नदियों ने विकराल रूप धारण कर लिया है, जिनका पानी काल बनकर 600 गावों में बह रहा है, लेकिन नेताओं की मस्ती कहा खत्म होने वाली है। और तो और जब उनसे सवाल किये जाते हैं कि बाढ़ के बीच में आप फिल्म कैसे देख सकते हैं तो उनका जवाब भी ऊलजलूल होता है।

कुछ नेताओं का कहना है कि हमारे इलाके बाढ़ नहीं है इसलिए हम फिल्म देखने पहुंचे हैं वहीँ कुछ का कहना है कि बाढ़ कल खत्म हो जायेगी, बाढ़ की भी चिंता है। एक का तो कहना है कि बाढ़ है तो क्या खाना पीना छोड़ दें।

वाह क्या चिंता है नेताओं को! लाचार और बेबस गरीबों को देखने का समय होता तो शायद नेतागण मल्टीप्लेक्स में बैठकर पॉपकॉर्न खाने की बजाए, बेसहारा बाढ़ पीड़ितों के लिए एक वक्त के खाने का तक इंतजाम कर देते हैं। देश में चाहे कुछ भी हो जाए, लेकिन नेता तो शायद यही कहते होंगे कि पानी घुसे बस्ती में, अपन रहो मस्ती में…!

ट्रेंडिंग न्यूज़
Share.