Chamki Fever Alert : बिहार के बाद अब इस राज्य में चमकी का अलर्ट

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बिहार (Bihar) में चमकी बुखार (Chamki Fever Odisha Alert) बच्चों के लिए काल बन चुका है। इससे अभी तक 140 से ज्यादा बच्चे काल के गाल में समा चुके हैं। अब बिहार के अलावा एक और राज्य इस बुखार की चपेट में आ रहा है। पिछले 24 घंटे के अंदर बिहार के मुजफ्फरपुर के मेडिकल कॉलेज में 75 नए मरीज भर्ती हुए हैं।  418 बच्चों का इलाज चल रहा है, जिसमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। मौत की शुरुआत के करीब 20 दिन बाद मंगलवार सुबह-सुबह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) मुजफ्फरपुर के SKMCH अस्पताल पहुंचे थे।

Chamki Bukhar : लक्षण, कारण, इलाज और बचाव?

 जानकरी के अनुसार, चमकी बुखार (Chamki Fever Odisha Alert) को लेकर ओडिशा (Odisha ) में भी अलर्ट जारी किया जा चुका है। वहीँ ओडिशा सरकार (Odisha Government ) की ओर से स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने एक नया आदेश जारी किया गया है। कई लोगों का कहना है कि ये बुखार लीची (Lychees) के कारण हो रहा है। अब राज्य के बाजारों में बिक रही लीची के सैंपल इकट्ठे किये जा रहे हैं और उन्हें जांच के लिए भेजा जा रहा है। जांचकर्ताओं का कहना है कि लीची से चमकी बुखार होने की बात सामने आई है, इसीलिए अब और अच्छे से जांच की जा रही है।

Chamki Fever से 56 बच्चों की मौत, जानिये लक्षण और कैसे करें बचाव

चमकी बुखार (Chamki Fever Odisha Alert) से हो रही मौतों के बाद अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। इस बारे में दो वकीलों ने जनहित याचिका दायर कर मांग की है कि बीमारी से प्रभावित इलाकों में केंद्र और बिहार सरकार को 500 आईसीयू बनाने का आदेश दिया जाए, प्रभावित इलाकों में मेडिकल एक्सपर्ट टीम भेजने के निर्देश दिए जाएं और 100 मोबाइल ICU मुजफ्फरपुर भेजे जाएं।

स्वास्थ्य मंत्री नवकिशोर दास ने आयुक्तों को बाजार में बिक रही लीची की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने इस बारे में कहा कि इस बात की जांच की जाए कि क्या लीची में कोई ऐसा जहरीला पदार्थ है, जो इंसान के शरीर पर असर डाल सकता है। ऐसी खबरें हैं कि बिहार में सौ से ज्यादा बच्चों की मौत खाली पेट लीची खाने से हुई है। हालांकि इसे लेकर अब तक डॉक्टरों की राय बंटी हुई है। इस संक्रमित बीमारी के कारण बच्चे नींद में बार-बार चमक जाते हैं। बीमारी के वायरस शरीर में पहुंचते ही खून में शामिल होकर प्रजनन शुरू कर देते हैं। शरीर में इस वायरस की संख्या बढ़ने पर ये खून के साथ मिलकर व्यक्ति के मस्तिष्क तक पहुंच जाते हैं। मस्तिष्क में पहुंचने पर ये वायरस कोशिकाओं में सूजन पैदा कर देते हैं, जिससे सोचने और समझने की शक्ति समाप्त हो जाती है।

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