देश के 75 फीसदी हिस्से में शुद्ध पेयजल नहीं

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पृथ्वी का 71 प्रतिशत भूभाग जल से घिरा होने के बाद भी दुनिया के कई देशों में जलसंकट छाया रहता है|  उन्हीं देशों में से एक है भारत, जो इस समय पेयजल के मामले के एक बड़े संकट के दौर से गुजर रहा है और संकट का आलम यह है कि देश की 75 प्रतिशत आबादी को आज पीने के लिए शुध्द जल नहीं मिल पा रहा है|  स्थिति यही रही तो आने वाले 2 वर्षों में देश के 21 शहरों में पीने का पानी समाप्त हो जाएगा|

नीति आयोग ने गुरुवार को ‘समग्र जल प्रबंधन सूचकांक’ जारी किया,जिसके अनुसार  देश के तीन चौथाई घरों में पीने का साफ पानी तक उपलब्ध नहीं है।

नीति आयोग के अनुसार, देश की जनसंख्या का बड़ा हिस्सा किसी न किसी समस्या से जूझ रहा है । समस्या में जलस्तर लगातार गिरना, पानी की गुणवत्ता खराब होना और पानी के लिए पाइपलाइन न होने जैसी बातें शामिल हैं।

इस रिपोर्ट को जारी करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि देश में पानी की कमी नहीं है, पानी के नियोजन की कमी है। उन्होंने सुझाव दिया कि समुद्र में जाने वाले पानी के इस्तेमाल पर काम करना चाहिए। वहीं नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा, भारत में मानसून बेहतर रहता है। ऐसे में कभी महसूस नहीं किया गया कि जलसंकट का भी सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने गुजरात की तर्ज पर अन्य राज्यों में जल प्रबंधन के लिए विशेष नीति बनाने की बात कही  ।

गौरतलब है कि जल गुणवत्ता सूचकांक में भारत दुनिया के 122 देशों में 120वें स्थान पर है। आज देश में 84 फीसदी ग्रामीण घरों में पाइप से पानी की आपूर्ति नहीं होती| 70 फीसदी देश में उपलब्ध पानी संक्रमित है| 2 लाख मौतें दूषित पानी पीने की वजह से हुई|  2008 में 634 अरब गहन मीटर पानी की मांग के मुकाबले 650 अरब घन मीटर थी उपलब्धता थी जबकि 2030 में पानी की उपलब्धता 744 अरब घन मीटर , जबकि मांग 1498 अरब घनमीटर हो जाएगी|  2050 तक देश के सकल घरेलू उत्पाद को छह फीसदी का नुकसान केवल जलसंकट के कारण होगा | यह सब जानकारी एक बड़े खतरे का अंदेशा है, जिससे निपटने के लिए हमे समुचित प्रयास और उपक्रम करने की आवश्यकता है|

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