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हिन्दू विश्वविद्यालय में मुस्लिम टीचर क्यो ? मचा घमासान

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स्कूल और कॉलेज में प्राय: जातिगत भेदभाव को मिटा कर एकता का पाठ पढ़ाया जाता है, लेकिन अब देश में  शिक्षा के एक मंदिर में शिक्षा के बीच धर्म को लाया जा रहा है। अयोध्या में विवादित भूमि (Ayodhya Disputed Land Case) को लेकर चल रहा हिन्दू और मुस्लिम विवाद अभी सुलझा भी नहीं और उससे पहले ही देश के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में शुमार एक हिन्दू विश्वविद्यालय में मुस्लिमों की एंट्री पर बवाल मचा गया है। विश्वविद्यालय के छात्रों ने मोर्चा खोल रखा है और खुलकर हिंदुवादी विचारधारा का प्रचार कर रहे हैं। छात्रों का यह हंगामा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (Banaras Hindu University) में किया जा रहा है।

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मुस्लिम प्रोफेसर का बहिष्कार

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (Banaras Hindu University) के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान (SVDV) फैकल्टी के साहित्य विभाग में एक मुस्लिम सहायक प्रोफेसर (Muslim Assistant Professor ) की नियुक्ति के बाद वहां हंगामा मच गया। पहले तो छात्रों ने मुस्लिम सहायक प्रोफेसर की कक्षा में बैठने से मना कर दिया और इसके बाद विश्वविद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। विभाग के शोध छात्रों और अन्य छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में कुलपति के निवास के पास होलकर भवन के सामने जमकर हंगामा किया। छात्रों ने एक सुर में कहा कि हिन्दू विश्वविद्यालय (Hindu University)  में मुस्लिम प्रोफेसर क्यो ? हंगामा कर रहे छात्रों ने संगीत वाद्ययंत्रों को बजकर अपनी मांगे बताई।

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यूनिवर्सिटी ने दिया छात्रों को जवाब ?

BHU प्रशासन ने हंगामा कर रहे छात्रों को यह साफ कर दिया है कि वे मुस्लिम प्रोफेसर की नियुक्ति पर कोई फैसला नहीं लेंगे। उम्मीदवार की नियुक्ति यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन (यूजीसी) के नियमों और BHU के अधिनियमों के तहत पारदर्शी तरीके से हुआ है। इसीलिए उनकी नियुक्ति रद्द नहीं की जा सकती है। छात्रों ने इसके बाद  BHU के कुलपति राकेश भटनागर के नाम एक पत्र भी लिखा। पत्र में लिखा गया है कि विश्वविद्यालय के संस्थापक व दिवंगत पंडित मदन मोहन मालवीय ने SVDV फैकल्टी को विश्वविद्यालय के दिल का दर्जा दिया था। फैकल्टी की स्टोन प्लेट में यह भी लिखा गया है कि यह संस्था सांस्कृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक तर्क-वितर्क और सनातन हिंदुओं और उनकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शाखाओं जैसे आर्य समाज, बौद्ध, जैन, सिख आदि के विचार-विमर्श के लिए भी है। ये सब बातें जानने के बाद भी मुस्लिम प्रोफेसर कि नियुक्ति गलत है।

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     – Ranjita Pathare 

 

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