बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने आखिर क्यों टाल दी भारत की यात्रा

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बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन (AK Abdul Momen) आज यानी 12 दिसंबर की शाम 5 बजकर 20 मिनट पर भारत के दिवसीय दौर पर पहुंचने वाले थे। हालांकि उन्होंने भारत का यह दौरा रद्द कर दिया। इसके पीछे उन्होंने वजह बताई कि स्टेट मिनिस्ट और विदेश सचिव की गैरमौजूदगी में उन्हें यहां विजय दिवस कार्यक्रम में शामिल होना है। लेकिन उनका भारतीय दौरा रद्द करने के पीछे असल कारण तो कुछ और ही है। दरअसल उनके भारतीय दौरे को रद्द करने के पीछे की वजह नागरिकता संशोधन विधेयक (citizenship amendment bill) के पारित होने से उत्पन्न हुई चिंताजनक स्थिति है।

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बना नागरिकता संशोधन विधेयक

नागरिकता संशोधन विधेयक (citizenship amendment bill) को लेकर 11 दिसंबर को अब्दुल मोमेन (AK Abdul Momen) ने बांग्लादेशी एक अखबार से कहा था कि, “बांग्लादेश में हिंदुओं के ऊपर अत्याचार को लेकर वो (भारत सरकार) जो कह रही है, वो ग़ैरज़रूरी और ग़लत है। अगर अमित शाह कुछ महीने बांग्लादेश में रहें, तो वो हमारी सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल देख पाएंगे।” आगे उन्होंने कहा कि, “हम बांग्लादेश में किसी को उसके धर्म के आधार पर जज़ नहीं करते। यहां सारे लोग बांग्लादेश नागरिक हैं और उनके (भारत) अपने देश में कई मुश्किलें हैं। इसके अलावा उन्होंने कहा कि हमे पूरी उम्मीद है कि भारत ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाएगा जिससे उसके और भारत के रिश्ते ख़राब हों।

फांसी के खौफ से बदहवास हो रहे निर्भया के हत्यारे

गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन विधेयक (citizenship amendment bill) दोनों सदनों में पास हो गया और अब इस विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया है। हालांकि इस बिल के पास होने के बाद असम और पूर्वोत्तर के कई राज्यों कड़ा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। यहां के हालात काफी चिंताजनक बने हुए हैं। असम में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगाया गया है और यहां की इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं हैं। इन हालातों के कारण कई यात्रियों को परेशानियां उठानी पड़ रही हैं और कई यात्री गुवाहाटी हवाई अड्डे पर फंसे हुए हैं। इस बिल के पहले असम राज्य में नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटज़न्स (NRC) लागू किया गया था जिससे करीब 19 लाख लोग राज्य से बाहर हो गए थे। चूंकि सबसे ज़्यादा संख्या बांग्लादेश से आए शरणार्थियों की थी तो ऐसे में बांग्लादेश और भारत के बीच यह मामला काफी संवेदनशील हो गया है।

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Prabhat Jain

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