दुष्कर्मी ढोंगी बाबा पूरी जिंदगी काटेगा जेल में

0

77 वर्षीय आसाराम को कल जोधपुर कोर्ट में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई| आसाराम जेल में अब कैदी नंबर 130 के नाम से जाना जाएगा| अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति मामलों की विशेष अदालत ने आसाराम के साथ शिल्पी और शरद को भी दोषी करार दिया तथा प्रकाश और शिव को बरी कर दिया|

तांगा चलाने वाले आसाराम ने साबरमती नदी के किनारे एक झोपड़ी से शुरुआत करके दुनियाभर में 400 से अधिक आश्रम का निर्माण करवाया तथा 10,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति खड़ी कर दी|

गौरतलब है कि आसाराम पर उसी के आश्रम में रहने वाली नाबालिग बच्ची ने दुष्कर्म का आरोप लगाया था| उत्तरप्रदेश के शाहजहांपुर की रहने वाली पीड़िता मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा स्थित आसाराम के आश्रम में पढ़ाई कर रही थी| मामला उजागर होने के बाद आसाराम को मध्यप्रदेश के इंदौर आश्रम से गिरफ्तार किया गया था| आसाराम पर गुजरात के सूरत में भी बलात्कार का एक मामला चल रहा है| आसाराम ने इस मामले में 12 बार जमानत याचिका दायर की, जिसे छह बार निचली अदालत ने, तीन बार राजस्थान उच्च न्यायालय ने और तीन बार उच्चतम न्यायालय ने खारिज कर दिया|

मामले में कब क्या हुआ

15 अगस्त 2013 को उत्तरप्रदेश के शाहजहांपुर की एक किशोरी के साथ जोधपुर के मनाई आश्रम में दुष्कर्म हुआ, इसके बाद 19 अगस्त को नई दिल्ली के कमला नेहरू नगर थाने में एफआईआर दर्ज करवाई गई| एफआईआर दर्ज होने के बाद 20 अगस्त को पीड़िता का मेडिकल परीक्षण करवाया गया|  21 अगस्त को यह मामला  नई दिल्ली से जोधपुर भेज दिया गया| इसके बाद  26 अगस्त को आसाराम के खिलाफ वारंट जारी किया गया और 30 अगस्त को आसाराम ने अदालत से 20 दिन की मोहलत मांगी,  लेकिन उसे समय नहीं दिया गया|

31 अगस्त की रात 12 बजकर 26 मिनट पर पुलिस आसाराम के इंदौर आश्रम में पहुंची और  1 सितंबर 2013 को पुलिस ने आसाराम को गिरफ्तार किया और उसे जोधपुर जेल में रखा गया| इस मामले पर 25 अप्रैल को उसे उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई|

Share.