आयोध्या पर फैंसले के बाद SC ने काशी मथुरा-विवाद के लिए किये दरवाजे बंद

0

नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े मुद्दे आयोध्या विवाद (Ayodhya Verdict) का शनिवार को निराकरण हो गया सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैंसला सुनाते हुए विवादित स्थल पर राममंदिर बनाने का आदेश दिया है और मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया है। इस फैंसले के अलावा सुप्रीम कोर्ट की इस बेंच ने देश के तमाम विवादित धर्मस्थलों पर भी अपना रुख स्पष्ट किया. देश की शीर्ष अदालत के फैसले से साफ हो गया कि काशी (Kashi) और मथुरा (Mathura) में धार्मिक स्थलों की मौजूदा स्थिति आगे भी बनी रहेगी. उनमें बदलाव के कोई आसार नहीं है।

क्या महाराष्ट्र के हालात फिर दे रहे हैं चुनाव के संकेत ?

जानकरी के अनुसार अयोध्या की तरह काशी के विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद (Vishwanath Mandir-Gyanvapi Masjid Dispute) विवाद और मथुरा में भी मस्जिद विवाद सालों से चल रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने 1,045 पेज के फैसले में 11 जुलाई, 1991 को लागू हुए प्लेसेज़ ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविज़न) एक्ट, 1991 का जिक्र करते हुए साफ कर दिया कि काशी और मथुरा में जो स्थिति अभी है वह आगे भी बरक़रार रहेगी। मतलब अब देश में इस प्रकार के जितने भी विवाद है वो उसी तरह बरकरार रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा की  ‘सार्वजनिक पूजा स्थलों को संरक्षित करने के लिए संसद ने बिना किसी अनिश्चित शब्दों के आदेश दिया है कि इतिहास को वर्तमान और भविष्य में विवाद के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.’

जब इमरान खान ने पूछा हमारा सिद्धू किधर है Video viral

प्लेसेज़ ऑफ वर्शिप एक्ट-

साल 1991 में केंद्र में नरसिम्हा राव की सरकार थी. राव सरकार को शायद एक साल पहले ही अयोध्या (Ayodhya Verdict) में बाबरी विध्वंस जैसा कुछ होने की आशंका हो गई थी. उस वक्त विवाद सिर्फ अयोध्या को लेकर ही नहीं था, काशी और मथुरा जैसे कई धार्मिक स्थल भी थे जिनकी स्थिति काफी हद तक अयोध्या जैसी थी. किसी धार्मिक स्थल पर बाबरी विध्वंस जैसा कुछ न हो इसके लिए उस वक्त (1991 में) एक कानून पास हुआ. उसी कानून का नाम था प्लेसेज़ ऑफ़ वर्शिप (स्पेशल प्रोविज़न) एक्ट, 1991. इस एक्ट में इस बात का स्पष्ट उल्लेख था कि 15 अगस्त, 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस संप्रदाय का था वो आज, और भविष्य में, भी उसी का रहेगा. बेंच ने इस एक्ट के बारे में कहा ‘देश ने इस एक्ट को लागू करके संवैधानिक प्रतिबद्धता को मजबूत करने और सभी धर्मों को समान मानने और सेक्युलरिज्म को बनाए रखने की पहल की है.’

 

बीजेपी दे जवाब सिद्धू देशद्रोही तो सनी क्या?

-Mradul tripathi

Share.