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मुस्लिम पक्ष वापस लेना चाहता है केस

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राम जन्‍मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद (Ram janam bhumi-babri masjid) दशकों से चला आ रहा है। अब इस मामले में नया मोड सामने आया है। पिछले काफी समय से सुप्रीम कोर्ट में चल रहे इस मामले में अब मुस्लिम पक्ष ने अपने हाथ पिछले खींच लिए हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि उत्‍तर प्रदेश सुन्‍नी सेंट्रल वक्‍फ बोर्ड (Sunni Waqf Board) ने इस मामले में दायर केस को वापस लेने का निर्णय लिया है।

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सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड (Sunni Central Waqf Board) ने हलफनामा दाखिल करने से पहले अपने वकीलों से सलाह-मश‌वरा भी नहीं किया। इसके बारे में वक्‍फ बोर्ड ने मध्‍यस्‍थता पैनल के जरिये इस बाबत सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में हलफनामा (Affidavit) दाखिल कर कहा है कि उन्हें इस बारे में कोई भी जानकारी नहीं है। वहीं सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह अब आगे यह केस नहीं लड़ना चाहता है इसीलिए वे अब यह केस आगे नहीं लड़ना चाहते हैं।

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वक्‍फ बोर्ड (Sunni Central Waqf Board) के वकील का इस मामले में कहना है कि वे नहीं जानते हैं कि सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड ने यह मामला वापस लें लिया है। राम जन्म भूमि और बाबरी मस्जिद विवाद का मामला आठ मुस्लिम पक्षकारों ने केस दायर किया था। इसमें मुख्‍य पक्षकार सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड की ओर से दो मामले दायर किए गए थे। वहीं मुस्लिम पक्ष की ओर से पक्षकार इकबाल अंसारी के वकील एम.आर. शमशाद का कहना है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने जमीन पर दावा छोड़ने की बात नहीं की है, ये सभी अफवाहें हैं। उन्होने आगे कहा कि जो शीर्ष न्यायालय का फैसला होगा वही मान्य होगा। पिछले दो महीनों में सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड के रवैये में आमूलचूल परिवर्तन आया था। इस मामले में कुल छह मुस्लिम पक्षकार हैं, जिनमें से सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड भी एक था।

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इकबाल अंसारी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट इस केस में जो भी फैसला करेगा, वो मानेंगे। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि फैसला जिसके भी पक्ष में आए, उसे मानना चाहिए। लोग शांति से सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करें।

     – Ranjita Pathare 

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