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93 साल के वकील की 40 साल की लड़ाई से हुई रामलला की जीत

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नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े मुद्दों में से एक रामजन्मभूमि पर आज सुप्रीम कोर्ट(Supreme Court) का फैंसला आ गया। सबसे बड़ी बात पूरे देश ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैंसले का सम्मान किया है। कोर्ट ने विवादित भूमि पर राम मंदिर बनाने का आदेश दिया है। और केंद्र को निर्देश दिया है की वह मुश्लिम पक्ष को 5 एकड़ जमीन दे मस्जिद बनाने के लिए। लेकिन इन सभी के बीच कुछ ऐसे लोग भी थे जिनका इस पूरे मामले में बहुत बड़ा योगदान रहा या यूँ कहना चाहिए की उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी इस मुद्दे की लड़ाई में लगा दी। जी हां 93 साल के एक वकील का रामलला की लड़ाई लड़ने में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। दरअसल, वरिष्ठ वकील के पारसरण (K Parasaran) ने हिंदू पक्ष की तरफ से दलीलें रखी थीं. पूर्व अटॉर्नी जनरल रह चुके पारसरण लंबे वक्त से पूरी लगन के साथ बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि (Babri Masjid-Ram Janmabhoomi dispute) पर हिंदू पक्ष की ओर से दलीलें कोर्ट में रख रहे थे.

जानकारी के अनुसार पारसरण की टीम में कई युवा वकील हैं. पारसरण बताते हैं कि वह हमेशा से ही भगवान राम के साथ आध्यात्मिक जुड़ाव महसूस करते हैं. इसलिए उन्होंने ये केस लड़ा. सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की रोजाना सुनवाई से पहले उन्होंने इस केस के हर पहलू पर बारीकी से काम किया. पारसरण रोजाना सुबह 10:30 बजे कानूनी दांवपेंचों को समझने में जुट जाते थे. उनका काम देर शाम तक लगातार चलता रहता था.


पारसरण की टीम भी इस बढ़ती उम्र में उनकी लगन, मेहनत और जुझारूपन को देखकर प्रेरित होती थी. वकील पीवी योगेश्वरण, अनिरुद्ध शर्मा, श्रीधर पोट्टाराजू, अदिति दानी, अश्विन कुमार डीएस और भक्ति वर्धन सिंह पारसरण की टीम के सदस्य थे. सदस्य बताते है कि पारसरण इस केस से इतने जुड़े हुए थे कि उन्हें अयोध्या मामले से जुड़ी महत्वपूर्ण तारीखें मुह जबानी याद है. किस तारीख में कौन सी घटना हुई थी, ये सब वह उंगली में गिनकर बता सकते हैं. पारसरण ने अयोध्या पर इतनी रिसर्च की है और इतना कुछ पढ़ा है कि उसपर एक किताब भी लिख सकते हैं.

-Mradul tripathi

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