SC ने खारिज की Ayodhya Case की सभी पुनर्विचार याचिकाएं

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वर्षों से चली आ रही अयोध्या जमीन (Ayodhya land dispute case ) की लड़ाई पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme court ) के पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगाई (Former Chief Justice Ranjan Gogai ) की अध्यक्षता वाली बेंच ने एतिहासिक फैसला सुनाया था।( Ayodhya Case Dismissed ) विवादित जमनी पर हिन्दूओं को राम मंदिर बनाने की इजाजत दी गई तथा मुस्लिमों को पाँच एकड़ जमीन देने का फैसला सुनाया गया।  लेकिन कोर्ट के इस फैसले पर कई लोगों ने आपत्ति जताई और पुनर्विचार याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने सभी रिव्यू पिटिशन को खारिज (Supreme Court dismisses all review petition ) कर दिया है और कहा है कि इस मामले मे आगे  सुनवाई नहीं होगी।

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गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में बंद चैंबर में पांच जजों की संवैधानिक बेंच ने 18 अर्जियों पर सुनवाई की और सभी याचिकाएं खारिज कर दी गईं। इस मामले में 9 याचिकाएं पक्षकार की ओर से, जबकि 9 अन्य याचिकाकर्ता की ओर से लगाई गई थी। ( Ayodhya Case Dismissed ) जिन पांच जजों की बेंच ने सुनवाई की उसमें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली में जस्टिस धनन्जय वाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस संजीव खन्ना शामिल थे।

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज हुई याचिकाओं में अखिल भारत हिंदू महासभा द्वारा दायर कि गई याचिका भी शामिल थी।( Ayodhya Case Dismissed ) हिंदू महासभा ने अदालत में पुनर्विचार याचिका दायर करके मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ भूमि उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड को आवंटित करने के निर्देश पर सवाल उठाये और साथ  ही  कहा था कि विवादित ढांचे को मस्जिद घोषित करने वाले फैसले को  भी हटाया जाए। इस मामले में 2 दिसंबर को पहली पुनर्विचार याचिका मूल वादी एम सिदि्दकी के कानूनी वारिस मौलाना सैयद अशहद रशिदी द्वारा दायर कि गई थी। इसके बाद कई याचिकाएँ दायर कि गई। तत्कालीन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से पूरी 2.77 एकड़ विवादित जमीन राम लला को दे दी थी, जिस पर अब सवाल उठाए जा रहे हैं।

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      – Ranjita Pathare 

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