रिपोर्ट लिखने के लिए पुलिसवाले ने रिश्वत में मांगी औरत की अस्मत

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देश में दुष्कर्म के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इन मामलों के कारण पूरे देश में रोष है, लेकिन सोचिये क्या होगा जब हमारे रक्षक ही भक्षक बन जाए। जिन पुलिसवालों पर सुरक्षा का भरोसा किया जाता है कई बार वे भी मौके की ताक में बैठे रहते हैं। पुलिस द्वारा थानों में खाकी वर्दी का रौब व गुरूर दिखाने की कई खबरे हमने सुनी है। ये भी सूना होगा कि कई बार कुछ भ्रष्टाचारी पुलिसवाले रिपोर्ट लिखने की एवज में रिश्वत (bribe)  मांगते हैं। ऐसा ही कुछ असम (Assam Police Harass To Women) में भी हुआ, लेकिन वहां पर पुलिस ने रिपोर्ट लिखने के बदले महिला की इज्ज़त ही मांग ली। ऐसे पुलिस वाले अपने पूरे डिपार्टमेंट को बदनाम करते हैं और समाज में गतल सन्देश फैलाते हैं।

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जानकारी के अनुसार, असम (Assam Police Harass To Women ) के पंजाबबाड़ी के हिलटाप रोड़ निवासी एक महिला जब सातगांव थाने,  शिकायत दर्ज करवाने गई तो थाने के द्वितीय प्रभारी जाकिर हुसैन खांडोकर ने पहले रिपोर्ट नहीं लिखी और इसके बाद वे छुट्टी पर चले गए। जांच का जिम्मा हुसैन को ही सौंपा गया था। अधिकारी ने महिला का बयान दर्ज करवाने के लिए महिला को अपने घर बुलाया। इसके बाद जब महिला पहुंची तो अधिकारी ने उससे जांच के बदले इज्ज़त की मांग की। महिला वहां से खुद को बचाकर भागी और मामले की शिकायत आला अधिकारीयों से की।

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आरोपी पुलिसवाले पर कार्रवाई (Assam Police Harass To Women )

पुलिसवाले की मांग से घबराई महिला सातगांव थाने पहुंची और उसने अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज करवाया। जांच में अधिकारी के दोषी पाए जाने के बाद गुवाहाटी के पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने उसें तुरंत सस्पेंड कर दिया। ऐसे मामले कई बार सामने आ चुके हैं, जब पुलिसवाले या तो कार्रवाई से मना कर देते हैं या फिर निराशाजनक व्यवहार करते हैं। जब हमारे देश की पुलिस की इतनी असंवेदनशील रहेगी तो कौन अपराधों में कमी लाने के लिए प्रयास करेगा।

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भोपाल में 9 साल की बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या के मामले में भी पुलिसवालों की बेरुखी सामने आई थी। जब बच्ची के पिता रात में मासूम के अपहरण की शिकायत करने पहुंचे थे, तब उन्हें कहा गया था कि लड़की किसी के साथ भाग गई होगी, लेकिन अगली सुबह पास के ही नाले में बच्ची का शव मिला था। इस मामले में यदि पुलिस ने सतर्कता दिखाई होती और रात को ही जांच शुरू कर देते तो शायद उस मासूम की जान बचाई जा सकती थी। खाकी वालों का यह रवैया समाज के लिए हानिकारक है। जिसे सुधारने के लिए सख्ती जरुरी है।

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