इस शख्स की वजह से आसाराम सलाखों के पीछे

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नाबालिग़ से दुष्कर्म के मामले में आसाराम को जोधपुर न्यायालय ने उम्रकैद की सज़ा सुनाई है, लेकिन शायद हम उस व्यक्ति के बारे में नहीं जानते होंगे, जिन्होंने बड़े से बड़े वकीलों के सामने भी बिना डर के केस लड़ा| इससे यह साबित हो गया कि जीत हमेशा सच्चाई की ही होती है|

एक साधारण से वकील पीसी सोलंकी ने आत्मविश्वास के दम पर आसाराम को सलाखों के पीछे पहुंचाया| राजस्‍थान के एक साधारण से परिवार में जन्मे पीसी सोलंकी के पिता रेलवे में मैकेनिक थे| वे दर्जी जाति से संबंध रखते हैं| उनकी मां पहले एक दिन में 30-40 शर्ट सिलती थीं| पिता बेहद साधारण थे और मां अनपढ़| परिवार में उनके अलावा तीन बहनें भी हैं| साधारण परिवार से होने के बावजूद माता-पिता की ज़िद ने एक बहन को नर्स, एक को टीचर और एक प्राइवेट नौकरी करने लायक बनाया|

जब उन्होंने वकील बनने का फैसला किया, तब ही उनके गुरु ने समझाया कि वकालत बहुत जिम्‍मेदारी का काम है, इस पेशे की छवि समाज में बहुत अच्‍छी नहीं, लेकिन अपनी छवि हम खुद बनाते हैं और अपनी राह खुद चुनते हैं, हमेशा ऐसा काम करो, जिससे कि सिर उठाकर चल सको और भविष्य में किसी से डरना न पड़े|

पीसी सोलंकी ने जब आसाराम के खिलाफ मुकदमा लड़ने का फैसला किया तब उन्हें बहुत धमकाया गया, पैसों का लालच दिया गया, लेकिन उन्होंने किसी के सामने घुटने नहीं टेके|

मामले में साढ़े चार वर्ष तक ट्रायल चला, उस दौरान वे एक बार भी अनुपस्थित नहीं रहे| 1000 बार से ज्‍यादा ट्रायल कोर्ट में पेश हुआ, जिसमें बड़े वकीलों ने भी अपने हाथ आजमाए| इनमें राम जेठमलानी, केटीएस तुलसी, सुब्रहमण्‍यम स्‍वामी, राजू रामचंद्रन, सिद्धार्थ लूथरा, सलमान खुर्शीद, सोली सोराबजी, विकास सिंह, एसके जैन शामिल थे| सबने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया,लेकिन किसी को भी सफलता नहीं मिली|

आखिरकार अंतिम सुनवाई में 15 मिनट में जज ने अपना फैसला सुना दिया था| जब जज फैसला सुना रहे थे, उस वक्त पीड़िता और उसके परिवार के साथ-साथ पीसी सोलंकी के लिए भी एक-एक पल पहाड़ की तरह बीत रहा था| आखिर सच्चाई की जीत हो गई| जज ने आसाराम को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई|

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