अब निर्भया के लिए सड़क पर उतरे अन्ना

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निर्भया गैंगरेप (Nirbhaya Rape Case) के बाद देश में ऐसे मामलों में तेजी से न्याय की मांग उठी थी और फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन हुआ था। हालांकि वक़्त के साथ-साथ यह मांग काफी दबती चली गई। लेकिन एक बार फिर यह मांग उठी है और इस बार इसे उठाया है सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे (Anna Hazare) ने। दरअसल देश में महिलाओं के खिलाफ जघन्य अपराधों की संख्या में बेहद ही तेजी से इजाफा हुआ है। इन अपराधों के मामलों में तेजी से न्याय की मांग को लेकर अब अन्ना हजारे अनशन पर बैठ गए हैं। दरअसल शुक्रवार को अन्ना हजारे अपने गांव रालेगण सिद्धि में ‘मौन-व्रत” पर बैठ गए। उनका गांव रालेगण सिद्धि महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित है। यहीं से अन्ना ने अपना मौन व्रत शुरू किया है।

गौरतलब है कि रालेगण सिद्धि अन्ना हजारे का पुश्‍तैनी गांव है। अन्ना हजारे का पूरा परिवार अन्ना के दादा की मौत के 7 साल बाद इस गांव में आकर बस गया था। तभी से अन्ना हजारे इस गांव में निवास कर रहे हैं। सभी लोग सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजाते को इसी नाम से जानते हैं लेकिन उनका वास्तविक नाम किसन बाबूराव हजारे (Kisan Baburao Hazare) है। हजारे का बचपन बेहद गरीबी में बीता और उनके पिता मजदूरी किया करते थे जबकि उनके दादा फ़ौज में थे। अपना मौन-व्रत शुरू करने से पहले अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री मोदी (Narendra Modi) को 9 दिसंबर को पत्र लिखकर इस बात की सूचना दी थी कि वे 20 दिसंबर से अनशन पर बैठेंगे।

गौरतलब है कि एक प्रेस विज्ञप्ति के दौरान अन्ना हजारे ने कहा, “मैंने निर्भया(Nirbhaya Rape Case) मामले में त्वरित न्याय के लिए अपना मौन व्रत शुरू कर दिया है और यदि यह नहीं मिलता है तो मैं अनिश्चितकालीन अनशन करूंगा।” आगे अन्ना बोले, “दिल्ली सहित कई राज्यों में महिलाओं के खिलाफ अपराध हो रहे हैं। देश के लोगों ने न्यायिक एवं पुलिस प्रक्रिया में देरी के चलते हैदराबाद बलात्कार एवं हत्या मामले में चार आरोपियों की मुठभेड़ में मौत का स्वागत किया।” अन्ना ने कहा कि दोषियों को सजा देने में देरी होने की वजह से लोगों का भरोसा न्यायपालिका से उठता जा रहा है और उन्हें अपराधियों का एनकाउंटर ही सही प्रतीत हो रहा है। अब अन्ना संसद में न्यायिक जवाबदेही विधेयक पारित होने को लेकर अनशन पर बैठे हैं।

Prabhat jain

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