अमित शाह ने नागारिकता कानून पर दिया बड़ा बयान

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नागरिकता संसोधन अधिनियम (Amit Shah Statement On CAB 2019) पर देश बवाल रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है। दिल्ली के जामिया में हुई हिंसक (Violence in Delhi’s Jamia ) घटना के बाद देश के कई हिस्सों में भी हिंसा शुरू हो गई है।  लोग सकड़ पर आकार मोदी सरकार (Protest against Modi government ) द्वारा लागू किए गए इस अधिनियम का विरोध कर रहे हैं। अब इस हंगामा के बीच गृहमंत्री अमित शाह का बड़ा बयान (Amit Shah Statement on Citizenship Amendment Act) सामने आया है। उन्होने बताया है कि आखिर नागरिकता संशोधन अधिनियम (Citizenship Amendment Act ) की क्या आवश्यकता पड़ी, जो इतने हंगामे के बाद भी उसे बदला नहीं जा रहा है।

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हिंदुओं को शरण दी जा रही है

एक निजी न्यूज़ चैनल को दिये गए इंटरव्यू में गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah Statement On CAB 2019) ने कहा कि क्या कांग्रेस पार्टी यह कहना चाहती है कि पूरी दुनिया में किसी भी देश का कोई भी मुसलमान आए, तो उसको स्वीकार कर लिया जाए, क्योंकि हिंदुओं को शरण दी जा रही है। इस प्रकार से देश चलता है क्या, कभी नहीं चल सकता। जहां तक भेदभाव का सवाल है, यूरोप  (Europe) के कई देशों ने नियम बनाए हैं ग्रीन कार्ड और नागरिकता के लिए कि इतना निवेश करोगे तभी नागरिकता मिलेगी, तो क्या यह गरीब के लिए भेदभाव नहीं है। इतना एजुकेशन होगा तो ही हम आपको नागरिकता देंगे, तो अनपढ़ के साथ भेदभाव नहीं है। अगर आप भारत के लिट्रेट साइंटिस्ट को ले रहे हो, तो भारत के गरीब को भी ले जाओ भैया। जो हमें पूछ रहे हैं कि ये भेदभाव कर रहे हैं, तो आप भी तो भेदभाव कर रहे हैं अलग तरीके से। हालांकि यहां हमने कोई भेदभाव नहीं किया।

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महात्मा गांधी का कमिटमेंट

शाह (Amit Shah Statement On CAB 2019) ने आगे कहा कि यह भारत सरकार का कमिटमेंट था। वहां जो सिख भाई रह गए, सारे वहां के अल्पसंख्यक रह गए। अगर वो उस देश में रहना नहीं चाहते हैं, तो उनको यह देश स्वीकार करेगा। यह इस देश की पार्लियामेंट (Parliament) का कमिटमेंट है। इस देश के प्रधानमंत्री का कमिटमेंट है और सबसे ऊपर महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) का कमिटमेंट है, जिसको देश में सबने माना है। एक्ट में इसका प्रावधान है। मोदी सरकार में ही करीब 600 मुस्लिमों को उसी के आधार पर नागरिकता दी गई है, जो उत्पीड़न का शिकार होने के बाद यहां आए थे हमारे देश की संसद, उस वक्त के प्रधानमंत्री, उस वक्त के राष्ट्रपति और महात्मा गांधी का कमिटमेंट है कि इन तीन देशों के अल्पसंख्यक जब वहां नहीं रहना चाहते हैं, तो वो जब भी यहां आएंगे, तो उनको शरण दी जाएगी और नागरिकता दी जाएगी

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       – Ranjita Pathare 

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