अमित शाह के बयान पर राजनीति में महासंग्राम

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आज हिन्दी दिवस (Hindi Diwas ) के मौके पर गृहमंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) ने देश को संबोधित किया, लेकिन उन्होने अपने बयान में कुछ ऐसा कहा कि राजनीतिक जगत में भूचाल मच गया है। विपक्ष के कई नेता अमित शाह के बयान का विरोध कर रहे हैं। कई राज्यों में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। बंगाल से लेकर दक्षिण के राज्यों से तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं हैं। वहीं सोशल मीडिया पर भी ‘#StopHindiImposition’ और #StopHindiImperialism के नाम से भी विरोध किया जा रहा है।

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हिंदी दिवस  के अवसर पर ‘एक देश, एक भाषा’ की वकालत कर रहे अमित शाह अब विपक्ष के नेताओं के निशाने पर आ गए हैं। गृह मंत्री ने कहा कि आज देश को एकता की डोर में बांधने का काम अगर कोई भाषा कर सकती है तो वह सर्वाधिक बोली जाने वाली हिंदी भाषा ही है। उनके बयान के बाद AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी  पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, DMK चीफ स्टालिन के साथ ही कई नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई।

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ओवैसी ने ट्वीट किया, “हिंदी हर भारतीय की मातृभाषा नहीं है। क्या आप इस देश की कई मातृभाषाएं होने की विविधता और खूबसूरती की प्रशंसा करने की कोशिश करेंगे। अनुच्छेद 29 हर भारतीय को अपनी अलग भाषा और कल्चर का अधिकार देता है। भारत हिंदी, हिंदू, हिंदुत्व से भी बड़ा है।”

DMK अध्यक्ष एमके स्टालिन ने भी शाह के बयान का विरोध किया और कहा कि हम लगातार हिंदी को थोपे जाने का विरोध कर रहे हैं। आज अमित शाह द्वारा की गई टिप्पणी से हमें आघात पहुंचा है, यह देश की एकता को प्रभावित करेगा। हम मांग करते हैं कि वह बयान वापस लें। दो दिन बाद पार्टी की कार्यकारी समिति की बैठक होने वाली है जिसमें इस मुद्दे को उठाया जाएगा। इसके साथ ही ममता बनर्जी ने भी शाह के बयान का विरोध किया। उन्होने कहा कि सभी की भाषाओं का सम्मान होना चाहिए।

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