Happy Birthday Amit Shah : भाजपा के ‘चाणक्य’, राजनीति के ‘शहंशाह’ अमित शाह

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भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party ) को अर्श से फर्श तक ले जाने वाले भाजपा के पूर्व अध्यक्ष (Former BJP President ) और गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah ) आज 55 साल (Happy Birthday Amit Shah ) के हो गए हैं। उन्हें भाजपा का चाणक्य (BJP’s Chanakya ) कहा जाता है, क्योंकि जिस प्रकार से चाणक्य ने एक पूरे साम्राज्य की स्थापना अपनी नीति और चतुराई से की थी वैसे ही अमित शाह ने भी मोदी सरकार (Modi government ) बनाने में अहम भूमिका निभाई है और उनके दफ्तर में भी चाणक्य की बड़ी फोटो लगी हुई है। शाह को राजनीति का शहंशाह कहना भी गलत नहीं होगा, क्योंकि उनके लिए राजनीति केवल चुनाव तक यानि वोट हासिल करने तक सीमित नहीं है बल्कि वे चौबीसों घंटे राजनीति का सबसे अच्छा उदाहरण पेश करते हैं (Amit Shah Birthday)। उनको राजनीति विरासत में नहीं मिली, उन्होने जब बीजेपी की कमान संभाली तब से पार्टी ने कई मुकाम हासिल किए हैं।

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शेयर ब्रोकर से राजनीति के शहंशाह बनने का सफर

अमित शाह का जन्म मुंबई के संपन्न गुजराती परिवार में 22 अक्टूबर 1964 को हुआ था।  उनके पिता का नाम अनिलचंद्र शाह और माता का नाम कुसुमबेन  शाह है (Amit Shah Birthday)। उनका राजनीति सफर बेहद दिलचस्प है। उन्होने अहमदाबाद से बॉयोकेमिस्ट्री में बीएससी की इसके बाद अपने पिता के अपने पिता के प्लास्टिक के पाइप के कारोबार मे हाथ बटाने लगे। इसी दौरान उन्होने स्टॉक मार्केट में शेयर ब्रोकर के रूप में भी काम किया, लेकिन इसके कुछ समय बाद ही राजनीति में कदम रखा और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

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महज 16 वर्ष की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े शाह जल्द ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (ABVP) के कार्यकर्ता बन गए थे। इसके कुछ समय बाद ही वे 1982 में एबीवीपी की गुजरात इकाई के संयुक्त सचिव बने और फिर इसके बाद हुई सदी के दो महान दिग्गजों की मुलाक़ात। 1986 में शाह और पीएम नरेंद्र मोदी की मुलाक़ात हुई, जो जल्द ही गहरी दोस्ती में बादल गई।

चुनावी जीत के लिए सफल बिसात बिछाने में माहिर

शाह एक अच्छे राजनीतिकार के साथ-साथ शतरंज खेलना, क्रिकेट  देखना और संगीत में भी गहरी रुचि रखते हैं। उन्हें भाजपा की सफल गाथा लिखने वाला सूत्रधार माना जाता है। उन्होने चुनावी जीत के लिए सफल बिसात बिछाने में माहिर माना जाता है। वे बूथ से लेकर चुनाव मैदान तक प्रबंधन और प्रचार की ऐसी सधी हुई बिसात बिछाते हैं कि मंझे से मंझे राजनीतिक खिलाड़ी भी उनके सामने मात खा जाता है।

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    – Ranjita Pathare 

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